भाई-दूज के दिन भगवान श्री कृष्ण गए थे अपनी बहन सुभद्रा के घर

भाई-दूज का त्यौहार भाई बहन के लिए बहुत महत्त्व रखता है। यह त्यौहार कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया को आता है। यह यम द्वितीया भी कहलाता है। यह दीपावली के पांच दिन का पर्व होता है। इस दिन दिवाली के पांच दिन का पर्व समाप्त हो जाता है। मान्यता है कि इस दिन यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर आमंत्रित करके उन्हें तिलक लगाकर अपने हाथ से खाना खिलाया था। जिससे यमराज बहुत प्रसन्न हुए थे और उन्होंने यमुना को मृत्यु के भय से मुक्त होकर अखंड सौभाग्यवती बने रहने का वरदान दिया था।

इसके अलावा भाई-दूज की एक और कथा है, जो भगवान  श्रीकृष्‍ण और उनकी बहन सुभद्रा से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने इसी दिन गए थे। सुभद्रा ने अपने घर में भगवान श्री कृष्ण का स्वागत करके अपने हाथों से उन्हें भोजन कराकर तिलक लगाया था।

श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा का उल्लेख हमें श्रीमद्भागवत पुराण और महाभारत में मिलता है। सुभद्रा श्रीकृष्ण और बलराम की बहन थी। वहीं पुरी (उड़ीसा) में ‘जगन्नाथ की यात्रा’ में बलराम और सुभद्रा दोनों की मूर्तियां भगवान श्रीकृष्ण के साथ ही रहती हैं।

ऐसा कहा जाता है कि सुभद्रा का विवाह कृष्ण ने अपनी बुआ कुंती के पुत्र अर्जुन से कराया था। लेकिन बलराम चाहते थे कि सुभद्रा का विवाह कौरव कुल में हो और बलराम के हठ के कारण श्री कृष्ण ने सुभद्रा का अर्जुन के हाथों हरण करवा दिया था। जिसके बाद में द्वारका में सुभद्रा के साथ अर्जुन का विवाह विधिपूर्वक संपन्न हुआ।