Makar Sakranti is riding on a lion

  • 14 जनवरी को सुबह 8 बजे होगा धनु राशि से मकर राशि में सूर्य का प्रवेश
  • पुण्य काल सुबह 8 से सूर्यास्त तक रहेगा

इस वर्ष मकर संक्रांति (Makar Sakranti) का महापर्व 14 जनवरी गुरुवार को मनाया जाएगा. सूर्य (Sun) का मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश करना मकर संक्रांति (Makar Sakranti) कहलाता है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और शास्त्रों में उत्तरायण (Uttarayan) की अवधि को देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि कहा गया है। इस तरह मकर संक्रांति एक प्रकार से देवताओं का प्रभात काल है।

मकर संक्रांति के दिन स्नान दान जप तप श्राद्ध तथा अनुष्ठान आदि का अत्यधिक महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया दान सौ गुना होकर प्राप्त होता है। मकर संक्रांति (Makar Sakranti) के दिन सूर्य अपनी कक्षाओं में परिवर्तन कर दक्षिणायन से उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। जिस राशि में सूर्य की कक्षा का परिवर्तन होता है उसे संक्रमण य संक्रांति कहा जाता है। 

14 जनवरी गुरुवार को सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश भारतीय मानक समय के विदिशा के स्थानीय समय के अनुसार सुबह 8 पर हो रहा है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश होते ही मकर संक्रांति का पुण्य काल प्रारंभ हो जाता है 14 जनवरी को  सुबह 8 से सूर्यास्त तक मकर संक्रांति का पुण्य काल रहेगा। ज्योतिषाचार्य प. सुनील मिश्रा ने के अनुसार मकर संक्रांति 14  जनवरी गुरुवार को भारतीय मानक समय अनुसार श्री सूर्य  मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही पर्व काल  प्रारंभ हो जाएगा। 

धर्म सिंधु धार्मिक ग्रंथ के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व काल संक्रांति होने से 40 घड़ी तक रहता है किंतु रात्रि में स्नान निषेध होने सुबह 8 बजे से सूर्यास्त पूर्व तक पर्व काल रहेगा मकर संक्रांति पर स्नान दान जप तप पूजन श्राद्ध का विशेष महत्व होता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर हुआ परिवर्तन माना जाता है। मकर संक्रांति से दिन बड़े होने लगते हैं और रात्रि की अवधि कम होती जाती है। स्पष्ट है कि दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा और रात्रि छोटी होने से अंधकार की अवधि कम होगी सूर्य ऊर्जा का अजस्त्र स्त्रोत है।

उत्तर प्रदेश में इस व्रत को खिचड़ी कहते हैं, इसलिए इस दिन खिचड़ी खाने तथा खिचड़ी तिल दान देने का विशेष महत्व है। बताया जाता है कि मकर संक्रांति से सूर्य तिल तिल बढ़ते हैं, इसी कारण मकर संक्रांति पर तिल का उबटन लगाकर स्नान करने तिल दान करने एवं तिल खाने का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष मकर संक्रांति का वाहन सिंह है, इसी कारण सिंह पर सवार होकर मकर संक्रांति आ रही है। संक्रांति का उपवाहन हाथी है। संक्रांति का आगमन सफेद वस्त्र धारण पाटली कुंचकी धारण किए वालावस्था मैं कस्तूरी लेपन कर गदा आयुष शस्त्र धारण किए हुए स्वर्ण पात्र मैं अन्य ग्रहण करते हुए आग्नेय दिशा को दृष्टिगत किए हुए पूर्व दिशा की ओर गमन करते हो रहा हैं।

इस वर्ष की मकर सक्रांति देश में सुख समृद्धि करने वाली

संक्रांति का फल-देशभर में सफेद वस्तुएं चांदी, चावल, दूध, शकर आदि के भावों में वृद्धि होगी। राजा के प्रति विरोध की भावना बदलती रहती रहेगी। ब्राह्मण वर्ग का सम्मान बढ़ेगा। सन्यासियों व किसानों को कष्ट रहेगा महामारी के प्रसार में कमी आएगी।

मकर संक्रांति दान का महत्व

धर्म शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति पर खिचड़ी, तिल, गुड, घृत, वस्त्र, अन्न, स्वर्ण, तांबे, पीतल दान करना चाहिए एवं किसी तीर्थ स्थान में स्नान करने का भी विशेष महत्व होता है। उत्तर प्रदेश में खिचड़ी तिल महाराष्ट्र में तेल, कपास, नमक, बंगाल में तिल दक्षिण में पोंगल, आसाम में बिहू, राजस्थान में 14 की संख्या में वस्तुएं दान की जाती हैं।

पंजाब एवं जम्मू कश्मीर में लोहडी के नाम से पर्व

पंजाब एवं जम्मू कश्मीर में लोहडी के नाम से पर्व मनाया जाता है सिंधी समाज लाल लोही के रूप में मकर संक्रांति का पर्व मनाते हैं। बताया जाता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम पर प्रयाग में मकर संक्रांति के दिन सभी देवी देवता अपना रूप बदलकर स्नान करने आते हैं। शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति को माँ गंगा स्वर्ग से उतर कर भागीरथ के पीछे पीछे चल कर कपिल मुनि के आश्रम में जाकर सागर में मिल गई थी। गंगा जी के पावन जल से ही राजा सगर के साठ हजार श्राप ग्रस्त पुत्रों का उद्धार हुआ था। इसी कारण गंगा सागर तीर्थ विख्यात हुआ था।

राशियों के अनुसार प्रभाव

राशियों के अनुसार मकर संक्रांति का फल मेष अष्ट सिद्धि- वृषभ धर्म लाभ- मिथुन शारीरिक कष्ट- कर्क सम्मान में वृद्धि- सिंह भय व चिंता- कन्या धन वृद्धि- तुला कलह व मानसिक चिंता- वृश्चिक धन आगमन खुशी- धनु धन लाभ- मकर स्थिर लक्ष्मी- कुंभ लाभ- मीन प्रतिष्ठा में वृद्धि।

राशियों के अनुसार दान

मेष :  तांबे की वस्तु चादर तिल लाल वस्तु

वृषभ : चांदी की बनी वस्तु सफेद वस्त्र तिल

मिथुन : हरी सब्जियां चादर छाता

कर्क : सफेद ऊनी वस्त्र मोती साबूदाना

सिंह : गुड गेहूं लाल वस्तु कंबल

कन्या : खिचड़ी मूंग दाल हरे वस्त्र उड़द

तुला : सात प्रकार के अन्य सफेद वस्त्र चावल शकर घी

वृश्चिक : लाल रंग के कपड़े तांबे का पात्र स्वर्ण मसूर 

धनु : पीले वस्त्र पीतल स्वर्ण चने की दाल धार्मिक ग्रंथ

मकर : काले रंग का कंबल तिल से बनी वस्तु

कुंभ : घी तिल साबुन अन्य

मीन : धार्मिक ग्रंथ पीली वस्तुओं का दान चने की दाल पीले वस्त्र।