भोलेनाथ को सावन में ऐसे चढ़ाएं बेलपत्र, बरसेगी कृपा शंभू की

    -सीमा कुमारी

    सनातन हिन्दू धर्म में सावन महीने (Sawan  Month) को बहुत ही शुभ एवं पवित्र माना जाता है। इस महीने का अपना अलग ही महत्व होता है। भगवान शिव को समर्पित यह महीना हिन्दू भक्तों के लिए विशेष फलदायी बताया गया है। ऐसे में पूरे महीने भक्तगण भक्ति से सराबोर होकर भगवान  शिव की पूजा अर्चना करते हैं।

    कहा जाता है कि, महादेव सावन मास में भक्तों की पूजा से जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। इस कारण पूरे सावन भर लोग महादेव की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उन्हें उनकी पसंदीदा चीजें चढ़ाते हैं।  जिससे वे अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उनके सारे दुखों और संकटों को हर लेते है। इन्हीं पसंदीदा चीजों में से ‘बेलपत्र’ भी है, जो महादेव को बेहद प्रिय है।

    धार्मिक मान्यता है कि बिना बेलपत्र चढ़ाए भगवान शिव की पूजा पूरी नहीं होती है। ऐसी मान्यता है कि शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और श्रद्धालु को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

    पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन में निकले विष को भगवान शिव द्वारा पीने के बाद उनका शरीर अत्यधिक गरम हो गया। तब देवी देवताओं ने विष की गर्मी को शांत करने के लिए बेलपत्र खिलाया और पानी से नहलाते रहे।  तब जाकर भगवान शिव कि विष की गर्मी से राहत मिली। तभी से भगवान महादेव को बेलपत्र अर्पित करने की प्रथा चल पड़ी। बेलपत्र चढ़ाते समय इन विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

    • जब भी भोलेशंकर को बेलपत्र चढ़ाएं, तो इस बात का ध्यान रखें कि बेलपत्र चढ़ाने के बाद जल जरूर अर्पण करें।
    • भगवान शिव को या शिवलिंग पर हमेशा तीन पत्तियों वाला ही बेलपत्र चढ़ाएं।
    • बेलपत्र चढ़ाते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप भी करें।
    • बेलपत्र कहीं से कटा-फटा न हो।
    • बेलपत्र चढ़ाने से पहले उसे खूब अच्छी तरह से साफ़ पानी में धो लें, उसके बाद ही भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें।