जाने क्या है पिशाच मोचन श्राद्ध और उसका महत्व

अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए पिशाच मोचन श्राद्ध किया जाता हैं। पिशाच मोचन श्राद्ध अगहन मास में मनाई जाती हैं। आज के दिन का महत्व उन लोगो के लिए अधिक है जो भूत प्रेत से

अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए पिशाच मोचन श्राद्ध किया जाता हैं। पिशाच मोचन श्राद्ध अगहन मास में मनाई जाती हैं। आज के दिन का महत्व उन लोगो के लिए अधिक है जो भूत प्रेत से डरते हैं उन्हें पितृदोष से मुक्ति मिलती है। पितृ दोष को शांत करने के लिए शास्त्रों में पिशाच मोचन श्राद्ध को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है।   

महत्व- श्राद्ध करके मनुष्य अपने पितरों को शांति प्रदान करता है और उन्हें प्रेत योनि से मुक्ति दिलाता है। अगर कोई पितरों की मुक्ति और शांति के लिए श्राद्ध कर्म या तर्पण नहीं करें तो उसे पितृदोष भुगतना पड़ता है साथ ही उसके जीवन में कई प्रकार के कष्ट आते हैं। अकाल मृत्यु में मरे लोगो के लिए पिशाच मोचन श्राद्ध बहुत जरुरी हैं। इस दिन किया गया श्राद्ध कर्म अक्षय होता है। इससे पितृ संतुष्ट होते हैं। यह श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आपकी सभी मनोकामना को पूर्ण करते हैं।

पिशाच मोचन श्राद्ध के  दिन तीर्थ, स्नान, जप, तप और व्रत करने से पुण्य प्राप्त होता है और सभी प्रकार के पापों से छुटकारा मिलता है। यह दिन संयम साधना और तपस्या के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।पिशाचमोचन श्राद्ध के दिन भगवान विष्णु की विशेष आराधना की जाती है। जिससे तन मन और धन से जुड़े सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। 

पूजा विधि: इस दिन प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने के पश्चात संकल्प लेकर उपवास करें। सबसे पहले दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। अब किसी पात्र में जल भरकर अपने सामने स्थापित करें, और सभी पितरों को जल अर्पित करें। अब अपने पितरों से अपने घर परिवार स्वास्थ्य आदि की के लिए प्रार्थना करें। तिलक और आचमन करने के बाद पीतल या तांबे के बर्तन में पानी लेकर उसमें दूध, दही, शहद, कुमकुम, अक्षत तिल और कुश रखे। इस दिन पितरों के लिए भोजन वस्त्र आदि का दान देना चाहिए।