इस दिन है ‘गंगा दशहरा’, जानिए महत्व, तिथि और पूजा-विधि

    -सीमा कुमारी

    हिंदू धर्म में गंगाजल को शुभ एवं पवित्र माना जाता है। इसकी पवित्रता मां के समान होने के कारण हिन्दू भक्त गंगा को मां का दर्जा देते हैं। इसके अलावा, हर शुभ कार्य और पूजा अनुष्ठान में गंगाजल का प्रयोग अवश्य किया जाता है। मां गंगा की महिमा एवं पवित्रता को ध्यान में रखते हुए हर साल ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी को ‘गंगा दशहरा’ का पावन पर्व मनाया जाता है। इस  साल  20 जून, यानी अगले रविवार को ‘गंगा दशहरा’ मनाया जाएगा।

    ‘गंगा दशहरा’ पर भगवान शिव और विष्णु की पूजा की जाती है। इसके साथ ही मां गंगा का पूजन किया जाता है। ‘गंगा दशहरा’ (Ganga Dussehra) के दिन किए गए दान-पुण्य करने से उसका फल कई गुना बढ़ जाता है।‌ ऐसे में इस खास अवसर पर गंगा में स्नान और दान करने से भक्तों के सभी पाप मिट जाते हैं और भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है।

    इसके साथ, गंगा का वैज्ञानिक महत्व भी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, गंगा नदी का जल वर्षों प्रयोग करने पर और रखने पर भी ख़राब नहीं होता है। इसके जल के नियमित प्रयोग से रोग दूर भी होते हैं। हालांकि, इन गुणों के पीछे का कारण अभी बहुत हद तक अज्ञात है। कुछ लोग इसे चमत्कार मानते  हैं और कुछ लोग इसे जड़ी-बूटियों और आयुर्वेद से भी जोड़ते हैं। विज्ञान भी इसके दैवीय गुणों को स्वीकार करता है।

    अध्यात्मिक जगत में इसको सकारात्मक उर्जा का चमत्कार कह सकते हैं। आइए जानें ‘गंगा दशहरा’ का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महिमा-

    शुभ मुहूर्त-

    ‘गंगा दशहरा’ का पावन पर्व 20 जून को मनाया जाएगा।

    ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी तिथि आरंभ-

    19 जून 2021, शनिवार को शाम 06 बजकर 50 मिनट से

    ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी तिथि समाप्त-

    20 जून 2021 को, रविवार को शाम 04 बजकर 25 मिनट पर 

    पूजा विधि

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर नित्यकर्म करके गंगा में स्नान करना चाहिए। इस समय कोरोना संकट को देखते हुए घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं। स्नान करने के बाद सूर्योदय के समय एक लोटे में जल लेकर उसमें थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।अब मां गंगा का ध्यान करते हुए गंगा के मंत्रों का जाप करें। पूजन और जाप पूर्ण होने के बाद मां गंगा की आरती करें और गरीब और जरूरतमंद ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान दें।

    महत्व

    पौराणिक परम्परा के मुताबिक, भगीरथी की तपस्या के बाद जब गंगा माता धरती पर आती हैं, उस दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी थी। गंगा माता के धरती पर अवतरण के दिन को ही गंगा दशहरा के नाम से पूजा जाना जाने लगा। इस दिन गंगा नदी में खड़े होकर जो ‘गंगा स्तोत्र’ पढ़ता है, वह अपने सभी पापों से मुक्ति पाता है। ‘स्कंद पुराण’ (Skand Puraan) में दशहरा नाम का ‘गंगा स्तोत्र’ दिया हुआ है।