ऐसे करें वृश्चिक संक्रांति के दिन पूजा, पढ़ें विधि

हिन्दू धर्म में संक्रांति बहुत पवित्र दिन माना जाता हैं। 12 राशियों में जब सूर्य का प्रवेश होता हैं तो हम उसे संक्रांति कहते हैं। सूर्य अगर मकर राशि में प्रवेश कर रहा है तो वह मकर संक्रांति कहलाई

हिन्दू धर्म में संक्रांति बहुत पवित्र दिन माना जाता हैं। 12 राशियों में जब सूर्य का प्रवेश होता हैं तो हम उसे संक्रांति कहते हैं। सूर्य अगर मकर राशि में प्रवेश कर रहा है तो वह मकर संक्रांति कहलाई जाती है उसी प्रकार जब सूर्य का आगमन वृश्चिक राशि में होता हैं तो हम उसे वृश्चिक संक्रांति कहते हैं।  संक्रांति के दिन धर्म कर्म और दान-पुण्य करने से अपार फल की प्राप्ति होती हैं। वृश्चिक संक्रांति के दिन संक्रमण स्नान, विष्णु और दान का खास महत्व होता है। इस दिन श्राद्ध और पितृ तर्पण का भी खास महत्व होता है।

वृश्चिक संक्रांति के विशिष्ट पूजन व उपाय से धन से जुडी सभी समस्याए हल होती हैं। मान्यताओं के अनुसार वृश्चिक संक्रांति में ब्राह्मण को गाय का दान करने का विशेष महत्व होता है। वृश्चिक संक्रांति के दिन की १६ घड़ियों को बहुत शुभ माना जाता है। इस दौरान दान और पुण्य करना बहुत लाभकारी माना जाता है।

पूजा विधि: प्रातः काल जल्दी उठकर सूर्यदेव का विधिवत पूजन करना चाहिए। लाल तेल का दीपक जलाना चाहिए, गुग्गल की धूप करें, रोली, केसर, सिंदूर आदि चढ़ाना चाहिए। लाल व पीले फूल चढ़ाएं। गुड़ से बने हलवे का भोग लगाएं तथा रोली, हल्दी व सिंदूर मिश्रित जल से सूर्यदेव को अर्घ्य दें। लाल चंदन की माला से "ॐ दिनकराय नमः” मंत्र का जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद के रूप में बाँट दे और भगवान से मंगल कमाना करे। परीक्षा में सफलता पाने के लिए इस दिन सूर्यदेव पर खजूर फल के रूप में चढ़ाये और बाद में उन चढ़े हुए खजूर के प्रसाद को गरीब छात्रों में बाटें।