PM Narendra Modi

    लगभग 10 वर्ष पूर्व जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने यूपीए को देश के संघीय ढांचे के लिए बड़ा गंभीर खतरा बताते हुए बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव पेश किया था. लखनऊ की इस बैठक में उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेतृत्व की केंद्र सरकार राज्यों के कानून बनाने के अधिकार छीन रही है, जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है तथा राज्यपालों को राजनीतिक एजेंट के तौर पर इस्तेमाल कर रही है. अब मोदी सरकार के केंद्र में 7 वर्ष पूरे हो गए हैं. जैसे आरोप उन्होंने यूपीए सरकार पर लगाए थे, आज वैसे ही आरोप उनकी सरकार पर भी लग रहे हैं.

    केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों को लेकर तनातनी देखी जा रही है. बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद हुई हिंसा की जांच करने केंद्रीय एजेंसी जा पहुंची. सभी 77 बीजेपी विधायकों को सीआईएसएफ की सुरक्षा दी गई. सीबीआई ने नारद स्टिंग मामले में ममता सरकार के 2 मंत्रियों तथा 2 अन्य टीएमसी नेताओं को गिरफ्तार किया. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पीएम की जिलाधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्रियों को बोलने नहीं दिया गया. समुद्री तूफान के बाद राहत पर विचार करने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसे लेकर फिर टकराव की नौबत आ गई.

    केंद्र ने मुख्य सचिव अलापन बंदोपाध्याय को वापस बुलाया लेकिन इसी बीच ममता ने उन्हें अपना राजनीतिक सलाहकार नियुक्त कर दिया. वैक्सीन नीति को लेकर भी केंद्र व राज्यों में टकराव देखा जा रहा है. झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि कोरोना मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने फोन पर उनकी बात नहीं सुनी. अब विपक्ष शासित राज्य सवाल कर सकते हैं कि कहां गया संघवाद?