80 Km रफ्तार हो तो एक्सप्रेस-वे बनाने की जरूरत ही नहीं

    एक्सप्रेस-वे का निर्माण इसीलिए किया जाता है ताकि कम समय में तेजी से दूर की यात्रा की जा सके. ये एक्सप्रेस-वे शहरों की भीड़भाड़ से दूर, 4-लेन या जरूरत के मुताबिक 6-लेन तक बनाए जाते हैं. इनकी वजह से प्रवास सुविधाजनक और द्रुतगति से संभव हुआ है. उत्तरप्रदेश में यमुना एक्सप्रेस-वे बना है तथा नागपुर-मुंबई के बीच भी समृद्धि महामार्ग बन रहा है. अमेरिका में एक्सप्रेस-वे पर कार की 65 मील (104.607 किलोमीटर) की स्पीड बनाए रखनी पड़ती है. हाइवे पर ओवरस्पीड की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की अधिसूचना को रद्द करते हुए एक्सप्रेस-वे पर टॉप स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटा से घटाकर 80 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी है.

    जस्टिस एन किरुबाकरन और जस्टिस टीवी थमिलसेल्वी की पीठ ने ओवरस्पीडिंग को अधिकांश सड़क हादसों की मुख्य वजह बताया है.  हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को मानने से इनकार कर दिया कि बेहतर सड़कों व गाड़ियों की उन्नत इंजन तकनीक को देखते हुए एक्सपर्ट कमेटी ने 120 किलोमीटर की स्पीड लिमिट तय की है. हाई कोर्ट ने कहा कि इंजन इस तरह कैलिब्रेट किया जाए कि स्पीड 80 से ऊपर न जाने पाए. सीधा सवाल है कि यदि ऐसी स्पीड लिमिट रहेगी तो फिर सैकड़ों करोड़ रुपए की लागत से एक्सप्रेस-वे बनाने की जरूरत ही नहीं है. इतनी स्पीड तो समान्य हाइवे में भी रहती है. सड़क खाली हो तो हर गाड़ी 80 से 100 की स्पीड में चलती ही है. संभवत: मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को केंद्र सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है क्योंकि यह निर्णय अधिकतम गतिसीमा को कम कर एक्सप्रेस-वे के निर्माण के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देता है.