महुआ का बदला लिया, ममता के निशाने पर टाटा के बाद अदानी

Loading

बंगाल (Bengal) की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) में प्रतिशोध की भावना कूट-कूटकर भरी हुई है. अपने प्रतिद्वंद्वियों के प्रति उनका रुख शत्रुतापूर्ण रहता है और बदला लिए बिना मानती नहीं! अपनी इसी मानसिकता के तहत ममता ने बंगाल के सिंगूर में हिंसक आंदोलन करवाते हुए टाटा को अपना नैनो प्लांट हटाने को मजबूर कर दिया था. अपनी जुझारू क्षमता की बदौलत ही ममता बनर्जी ने बंगाल में 3 दशकों से चले आ रहे लेफ्ट पार्टियों के शासन को उखाड़ फेंका था.

यह काम कांग्रेस या बीजेपी जैसी पार्टियों से कदापि संभव नहीं था. वामपंथियों की ईंट से ईंट बजाकर ममता ने उन्हें ठंडा करके रख दिया. बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नड्डा ने भरपूर कोशिश की लेकिन टीएमसी का कुछ बिगाड़ नहीं पाए. ममता ने अपने प्लास्टर लगे पैर से चुनाव का ‘खेला’ जीता लिया था. इस समय ममता बनर्जी ने टाटा के बाद उद्योगपति गौतम अदानी को निशाना बनाया है. दरअसल उन्होंने अपने पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा का बदला अदानी से लिया है.

कैश फॉर क्वेरी मामला

कैश फॉर क्वेरी (प्रश्न पूछने के बदले धन लेने) के मामले में महुआ मोइत्रा घिर गई थीं. यद्यपि ममता बनर्जी ने इस मामले में अब तक दूरी बना रखी थी किंतु अब उन्होंने एक बड़ा कदम उठाकर अदानी को करारा झटका दिया है. बंगाल सरकार ने अदानी ग्रुप से ताजपुर पोर्ट विकसित करने का 25,000 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट छीन लिया. इस ग्रुप को यह बड़ा प्रोजेक्ट 2022 में हुए बंगाल ग्लोबल बिजनेस प्रोजेक्ट के तहत दिया गया था. इसके बाद से विपक्ष लगातार अदानी ग्रुप पर निशाना साध रहा था.

‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल कुछ दलों ने भी इस पर अप्रसन्नता जताई थी. माना जा सकता है कि महुआ प्रकरण में अदानी को सबक सिखाने के लिए ममता बनर्जी ने यह कदम उठाया. उन्होंने कहा कि इसे लेकर जल्द ही नया टेंडर जारी किया जाएगा जिसमें कोई भी कंपनी शामिल हो सकेगी. ममता के इस कदम से स्पष्ट हो गया कि वह अपनी पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा के साथ मजबूती से खड़ी हैं.

महुआ की सांसदी गई

उल्लेखनीय है कि संसद में प्रश्न पूछने के बदले पैसे लेने के आरोप में संसदीय आचार समिति (एथिक्स कमेटी) ने महुआ को लोकसभा से निष्कासित करने की रिपोर्ट स्वीकार कर ली. बैठक में रिपोर्ट के पक्ष में 6 और विरोध में 4 सांसद थे. आचार समिति ने 500 पृष्ठों की रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि महुआ को सांसद बने रहने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए और उनकी सदस्यता छीन ली जानी चाहिए.

समिति ने महुआ मोइत्रा के कार्यकलापों को अत्यंत आपत्तिजनक, अनैतिक, जघन्य और आपराधिक करार देते हुए कड़ी सजा दिए जाने को कहा. साथ ही यह सिफारिश भी की कि मामले की कानूनी, गहन, संस्थागत और समयबद्ध जांच कराई जाए. समिति ने निष्कर्ष निकाला कि महुआ ने अनधिकृत व्यक्ति के साथ यूजर आईडी शेयर की और बदले में व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी से नकद रकम और सुविधाएं ली थीं जो बेहद गंभीर अपराध है.

दुबई में रहनेवाला हीरानंदानी व्यवसाय में गौतम अदानी का प्रतिद्वंद्वी है. स्वयं दर्शन हीरानंदानी ने स्वीकार किया कि महुआ ने सांसद के रूप में अपना ई-मेल आईडी मुझसे शेयर कर रखा था. मैं उसे सूचनाएं भेजता था जिसके आधार पर वह संसद में अदानी मुद्दे पर तीखे सवाल करती थी. उसका पासवर्ड मेरे पास रहने से मैं महुआ की ओर से सीधे सवाल पोस्ट कर सकता था. बदले में महुआ मुझसे कीमती गिफ्ट, छुट्टी बिताने का खर्च और सरकारी आवास के रिनोवेशन के लिए रकम लिया करती थी.