ममता की BJP के बाद, अब सोनिया को शह

    क्षेत्रीय पार्टियां जब अपने राज्य में ताकतवर हो जाती हैं और विधानसभा चुनाव में  राष्ट्रीय स्तर की बड़ी पार्टियों को धूल चटा देती हैं तो उनके हौसले बुलंद हो जाते हैं. उन्हें लगता है कि अब वे अन्य राज्यों में भी अपना विस्तार कर सकती हैं और भविष्य में केंद्र तक अपने पैर पसार सकती हैं. इसे क्षेत्रीय पार्टियों का अति आत्मविश्वास कहा जा सकता है लेकिन वे अपने प्रयासों में कसर बाकी नहीं रखतीं. टीएमसी प्रमुख व बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मिसाल सामने है. 

    विधानसभा चुनाव में ममता ने सिद्ध कर दिखाया कि बंगाल में उनकी पार्टी अजेय है. 5 राज्यों के चुनाव में बीजेपी ने सर्वाधिक संसाधन बंगाल में ही लगाए थे. चुनाव आयोग ने वहां 8 चरणों में चुनाव करवाया था इसलिए बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को बार-बार बंगाल जाकर प्रचार रैलियां करने का भरपूर मौका मिला. प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पूरी ताकत लगा दी. इतना करने के बाद भी तृणमूल कांग्रेस ही जीती. ममता ने मोदी को दिखा दिया कि बंगाल में वही सर्वेसर्वा हैं. चुनाव के बाद जो लोग बीजेपी में चले गए थे, उनमें से अधिकांश टीएमसी में वापस चले आए.

    कांग्रेस नेताओं को अपने पाले में लिया

    कांग्रेस हमेशा से चाहती है कि वह विपक्षी पार्टियों की अगुआ बनकर केंद्र में सत्तासीन बीजेपी से टक्कर ले, लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा. विपक्षी पार्टियां सोनिया या राहुल को अहमियत नहीं दे रही हैं. अपनी कम सीटों की वजह से कांग्रेस लोकसभा में अधिकृत विपक्षी पार्टी का दर्जा भी नहीं पा सकी. 2014 तथा 2019 के लोकसभा चुनावों में यही हाल रहा. पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मणिपुर में कांग्रेस की सरकारें हैं लेकिन बाकी राज्यों में वह कमजोर स्थिति में है. महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार में कांग्रेस जूनियर पार्टनर की हैसियत रखती है. 

    ऐसी स्थिति में क्षेत्रीय पार्टियां कांग्रेस का नेतृत्व स्वीकार करने के प्रति अनिच्छुक हैं. यूपी में सपा-बसपा, बिहार में राजद, ओडिशा में बीजद और बंगाल में टीएमसी को कांग्रेस की जरा भी परवाह नहीं है. ममता बनर्जी ने अपने दिल्ली दौरे में धमाका कर दिया. उन्होंने कांग्रेस के पूर्व सांसद कीर्ति आजाद और अशोक तंवर के साथ ही जदयू के पूर्व सांसद पवन वर्मा को टीएमसी में शामिल कर लिया. कीर्ति आजाद पूर्व क्रिकेटर हैं तथा उनके पिता भगवत झा आजाद भी कांग्रेस के बड़े नेता थे. 

    पवन वर्मा और कीर्ति आजाद बिहार से ताल्लुक रखते हैं जबकि अशोक तंवर हरियाणा से आते हैं. वह राहुल गांधी के करीबी थे. 2019 के विधानसभा चुनाव के पहले उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. कांग्रेस ने भी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया था.

    गोवा व हरियाणा पर निगाह

    ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी गोवा विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती है. वहां के पूर्व मुख्यमंत्री लुजिनो फलेरिओ टीएमसी में शामिल हो चुके हैं. ममता ने कहा कि वो जल्दी ही हरियाणा जाएंगी. टीएमसी ज्वॉइन करने वाले अशोक तंवर ने उन्हें निमंत्रण दिया है. उन्होंने नारा लगाया- जय हिंदुस्तान, जय हरियाणा, जय बंगाल, जय गोवा, राम-राम! कीर्ति आजाद ने कहा कि मुझे लगता है कि ममता बनर्जी में नेतृत्व करने की क्षमता है इसलिए मैंने टीएमसी में शामिल होने का फैसला किया.