खुर्शीद जैसे नेता डुबो रहे कांग्रेस की नैया, ऐन चुनाव के वक्त करते हैं तमाशा

    कांग्रेस पार्टी हमेशा से सर्वसामावेशक रही है लेकिन इसी पार्टी के कुछ नादान नेता जानबूझकर शरारतवश बेतुकी बातें कहकर बीजेपी को घर बैठे मुद्दा दे देते हैं. ऐसे नेताओं  की नीयत अपनी ही पार्टी की नैया डुबोने की होती है. खुद को बहुत विद्वान या बुद्धिजीवी मानने वाले ऐसे नेता कांग्रेस के लिए नुकसानदेह हैं. इनकी प्रवृत्ति कुछ ऐसी है कि जिस डाल पर बैठे हैं उसी पर कुल्हाड़ी चलाते हैं. मीडिया की मुख्य धारा में बैठे लोग भी इस साजिश को समझ नहीं पाते और इसे पकड़कर चलते हैं.

    अभी यूपी सहित 5 राज्यों का विधानसभा चुनाव सामने हैं. किसान आंदोलन और लखीमपुर खैरी जैसे मुद्दों से बीजेपी अड़चन में है. ऐसे मौके पर इन ज्वलंत मुद्दों को साइडट्रैक या अलहदा करने के लिए कोई विवादास्पद बात कह देना कांग्रेस के साथ गद्दारी नहीं तो और क्या है? सलमान खुर्शीद ने यही किया. उन्होंने अपनी किताब सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहुड इन अवर टाइम्स में हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हरम जैसे कुख्यात आतंकी संगठनों से की है. ऐसी बेतुकी बात कहकर उन्होंने कांग्रेस की हिंदू विरोधी छवि बनाने का शरारतपूर्ण प्रयास किया है.

    सिर्फ असहमति दर्शाना पर्याप्त नहीं

    सवाल यह है कि ऐसी वेसिर पैर की बातें करने वाले सलमान खुर्शीद पर कांग्रेस का एक्शन लेने जा रही है? सिर्फ उनके बयान से असहमति दर्शाना पर्याप्त नहीं है. कांग्रेस खुद मांग करे कि सलमान खुर्शीद की इस बदअमनी फैलानेवाली हिंदू विरोधी किताब पर प्रतिबंध लगाया जाए. संविधान ने अभिव्यक्ति या बोलने की आजादी दी नही है, बकवास करने की आजादी किसी को नहीं मिली है. किताब बेचने के लिए इस तरह की द्वेषपूर्ण व अलगाव पैदा करने वाली बातें करना खुर्शीद के ओछेपन और टुच्ची नीयत को दर्शाता है. इस तरह के गैरजिम्मेदार नेताओं का खुद का कोई आधार नहीं होता बल्कि वे अपनी पार्टी के आधार को भी नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. ऐसे अतिवादी नेताओं की वजह से ही कांग्रेस को हिंदू ओछी पार्टी कहा जाता है जबकि हकीकत यह नहीं है.

    कांग्रेस को हिंदुत्व से कभी परहेज नहीं रहा

    कांग्रेस कभी हिंदुत्व से परहेज नहीं किया प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू अपने नाम में ‘पंडित’ लगाना पसंद करते थे. सारादेश उन्हें पंडित नेहरू कहता था. इंदिया गांधी गले में रूद्राक्ष की माला धारण करती थीं और मंदिरों में जाती थीं. इंदिरा की अंत्येष्टि के समय राजीव गांधी के कंधे पर लटके जनेऊ की चर्चा हुई थी. स्वयं राहुल गांधी भी खुद को दत्तात्रेय गोत्र का जनेऊधारी ब्राम्हण बताते हैं.

    कुछ भी जुबान ज्यादा चलती है

    जब मणिशंकर अय्यर ने अपने अंग्रजी ज्ञान का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी के लिए ‘नीच’ शब्द का इस्तेमाल किया था तो कांग्रेस ने तुरंत उनकी प्रवक्ता की हैसियत छीन ली थी. अंग्रेजी के ‘मीन’ शब्द का पर्यायवादी हिंदी में नहीं याद आने की अय्यर की दलील थी. इसी तरह कुछ नेता व्यर्थ की बकवास कर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को उलझन में डाल देते हैं जिन पर पार्टी को सख्त होना होगा अन्यथा ऐसे लोग पार्टी की लुटिया डुबा देंगे.