रूपाणी की छुट्टी कर दी, BJP का भरोसा डगमगाया, 3 राज्यों में 4 CM बदल डाले

    लगता है बीजेपी का आत्मविश्वास डगमगा गया है तभी तो उसने 5 माह में अपने 4 मुख्यमंत्री बदल दिए हैं. यदि इन मुख्यमंत्रियों की काबिलियत में पार्टी को भरोसा होता तो वह उन्हे अपना 5 साल का टर्म पूरा करने देती. अंदर ही अंदर बीजेपी विपक्ष से डरी हुई है और अपने मुख्यमंत्रियों की क्षमता पर उसे संदेह है. प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने विधानसभा चुनाव से 1 वर्ष पहले ही अचानक इस्तीफा दे दिया. निश्चित रूप से बीजेपी हाईकमांड के निर्देश पर उन्होंने ऐसा किया. लगभग 1 माह पहले रूपाणी को हटाना तय कर लिया गया था. 2 दिन पहले बीजेपी के केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष ने रूपाणी को इस्तीफा देने की सलाह दी थी.

    रूपाणी को हटाने के पहले बीजेपी ने गुजरात में 3 सर्वे कराये थे. रूपाणी संयमित तरीके से काम करनेवाले नेता रहे जबकि बीजेपी को आक्रामक तरीके से अभियान चलानेवाले नेता राज्यों में चाहिए. गुजरात में पाटीदार आंदोलन फिर से सक्रिय होने की आशंका, कोरोना काल में कथित कुप्रबंध, ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी से पनपते असंतोष, बीजेपी संगठन का आंतरिक संघर्ष विजय रूपाणी की विदाई के कारण रहे. रूपाणी जैन समाज के हैं जिसकी गुजरात में सिर्फ 2 प्रतिशत आबादी है. गुजरात में निकाली गई जनसंवेदना यात्रा में केंद्रीय मंत्रियों को जनता की नाराजगी का अहसास हुआ. पार्टी को लगता है कि रूपाणी के हट जाने से जनता की नाराजगी कम होगी और अगला चुनाव जीतने में मदद मिलेगी. बीजेपी के आंतरिक सर्वे में पता चला कि मिशन 150 तो दूर बीजेपी को विधानसभा चुनाव में 2017 के समान 99 सीटें भी नहीं मिल पाएंगी. पिछला चुनाव रूपाणी के नेतृत्व में लड़ा गया था. तब न तो पाटीदार आंदोलन था न कोरोना. फिर भी बीजेपी 99 सीटों पर सिमट गई थी. 2 वर्षों में रूपाणी सरकार को अपने 23 फैसले बदलने पड़ गए थे.

    BJP यूपी के साथ ही गुजरात में चुनाव चाहती है

    राज्यों के नेतृत्व के प्रति अविश्वास की वजह से बीजेपी ने लगातार अपने मुख्यमंत्रियों को बदला. अप्रैल में असम में सर्वानंद सोनेवाल की जगह हिमंत बिस्वासरमा को सीएम बनाया, कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा की छुट्टी की गई. उत्तराखंड में त्रिवेंद्रसिंह रावत को हटाकर तीरथसिंह रावत को सीएम बनाया गया. फिर उन्हें भी हटाकर पुष्करसिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया. ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी यूपी और गुजरात में एक साथ विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है. चूंकि कांग्रेस में अभी भी संगठन, समन्वय व सक्रियता का अभाव है इसलिए जल्द ही चुनाव कराने में बीजेपी अपना फायदा देख रही है. कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल ने कहा कि बीजेपी अपनी नाकामी छिपाने के लिए यह सब कर रही है. सीएम बदलकर लोगों की नाराजगी कम करने की कोशिश की जा रही है. पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता भरतसिंह सोलंकी ने कहा कि बीजेपी राज्य सरकार के प्रदर्शन के आधार पर चुनाव लड़ने का जोखिम नहीं उठा सकती. वह लोगों का ध्यान हटाने और प्रधानमंत्री मोदी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए यह सभी कवायद कर रही है.

    संघ से समन्वय नहीं

    विजय रूपाणी को नॉन परफार्मेंस और संघ के साथ समन्वय नहीं करना महंगा पड़ा. वे जिस तरह अकुशल साबित हुए उससे संघ उनसे नाराज था. संघ प्रमुख मोहन भागवत गत 3 माह में 2 बार गुजरात की यात्रा कर आए हैं. माना जाता है कि 3 से 8 सितंबर तक नागपुर में हुई संघ की समन्वय बैठक में गुजरात में परिवर्तन की पटकथा लिखी गई जिसे तत्काल लागू किया गया. पटेल समुदाय को बीजेपी नाराज नहीं करना चाहती क्योंकि गुजरात की 182 में से 50 सीटों पर पटेल समुदाय निर्णायक स्थिति में है. सीआर पाटिल के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद से रूपाणी की मुश्किलें बढ़ गई थीं. दोनों नेताओं में मनमुटाव बना हुआ था. पाटिल ने पार्टी नेतृत्व को बताया कि रूपाणी के सीएम रहते प्रदेश में बड़ी जीत हासिल नहीं की जा सकती.