पहले एयरफोर्स मार्शल ‘अर्जन सिंह’, जिन्होंने 1 घंटे में पाकिस्तान को चटा दी थी धूल

अर्जन सिंह को देश का पहला एयर चीफ मार्शल बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। भारतीय वायु सेना (IAF) के सबसे वरिष्ठ और पांच स्टार रैंक वाले एकमात्र मार्शल थे। महज़ 19 साल की उम्र में पायलट ट्रेनिंग के लिए चुने गए, जो 44 साल की उम्र में एयरफोर्स चीफ बने। 16 सितंबर, 2017 को 98 साल की उम्र में उन्होंने दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च ऐंड रेफरल में आखिरी सांस ली थी। उनका निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। अर्जन सिंह को 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में अहम भूमिका निभाने के लिए याद किया जाता है। 

एक घंटे में उड़ा दिए थे पाकिस्तान के छक्के 

पाकिस्तान ने सितंबर 1965 में जम्मू-कश्मीर को हड़पने के मकसद से भारत पर हमला बोला, तब अर्जन सिंह आर्मी चीफ के साथ रक्षामंत्री से मिलने पहुंचे। तत्कालीन  रक्षामंत्री वाईबी चव्हाण ने अर्जन सिंह से पूछा कि, पाकिस्तान पर हवाई हमला करने के लिए उन्हें कितना वक्त चाहिए। जिसके जवाब में अर्जन ने उनसे कहा, ‘एक घंटा’, परंतु वे महज  26 मिनट बाद ही इंडियन एयरफोर्स के साथ पाकिस्तान पर चढ़ाई करने पहुंच चुके थे।

अखनूर की तरफ बढ़ रहे पाकिस्तानी टैंक और सेना के खिलाफ पहला हवाई हमला 1 घंटे से भी कम समय में कर दिया। जिसके बाद पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी। फिर भी, अर्जन सिंह को पाक के साथ युद्ध जल्दी खत्म होने का हमेशा अफ़सोस रहा।

सैनिकों के लिए बेच दिया था  खेत

अर्जन सिंह जंग के मैदान में जितने बहादुर थे, निजी जिंदगी में उतने ही दिलदार भी। उन्होंने दिल्ली में अपनी बहुत सारी जमीन और खेत बेचकर दो करोड़ रुपए का फंड बनाया और इसे रिटायर हो चुके एयरफोर्स कर्मियों की भलाई में लगा दिया। प्राइवेट प्रॉपर्टी को सैनिकों की भलाई में लगाने का ये अद्भुत उदाहरण है। अर्जन का जन्म पंजाब के ल्यालपुर में हुआ था, जो विभाजन के बाद पाकिस्तान के हिस्से चला गया और उसका नाम फैसलाबाद रखा गया। विभाजन के बाद उन्हें अर्जन के परिवार को पंजाब में आदमपुर के पास चिरुवाली गांव में 80 एकड़ की जमीन दी गई थी।  

अंग्रेज कभी नहीं कर पाएं अर्जन सिंह का कोर्ट मार्शल

सेना में अनुशासन का भंग करने पर सैनिकों का कोर्ट मार्शल किया जाता था। अर्जन सिंह ने अपने दौर में कई नियम तोड़े पर अंग्रेज चाहकर भी उनपर कोई कोई एक्शन नहीं ले पाए। बात फरवरी 1945 की है, तब अर्जन केरल के कन्नूर केंट एयर स्ट्रीप पर तैनात थे और वायुसेना की कमान अंग्रेजों के हाथों में था।  अर्जन ने उड़ान भरी और एयरक्राफ्ट लेकर सीधे कॉरपोरल के घर के ऊपर पहुंच गए। कॉरपोरल एयरफोर्स की एक रैंक होती है। अर्जन एयरक्राफ्ट को काफी नीचे उड़ा रहे थे और उन्होंने कॉरपोरल के घर के कई चक्कर लगाए।

अब्दुल कलाम का करते थे बेहद सम्मान 

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक देश के राष्ट्रपति रहे। 27 जुलाई 2015 को मेघालय की राजधानी शिलांग में एक कार्यक्रम में भाग लेते वक्त कलाम साहब की अचानक से तबीयत बिगड़ी थी। उसके बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। 28 तारीख को जब उनका शरीर दिल्ली लाया गया, तो एयरपोर्ट पर उन्हें श्रद्धांजलि देने अर्जन सिंह भी पहुंचे, उनकी तबीयत ख़राब थी और वे व्हीलचेयर पर थे। उनका शरीर उनका साथ नहीं दे रहा था, फिर भी वो आये। वो कलाम के पार्थिव शरीर के नज़दीक पहुंचे, शरीर कांप रहा था, फिर भी वो तनकर खड़े हुए और डॉ. कलाम को सल्यूट किया।

कभी रिटायर नहीं हुए अर्जन सिंह

देश के 5 स्टार रैंक अफसर वाले तीन सैन्य अधिकारियों में से अर्जन सिंह एक थे। जिनमें फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और फील्ड मार्शल के एम करियप्पा का नाम शामिल है। ये तीनों ही ऐसे सेनानी हैं, जो कभी सेना से रिटायर नहीं हुए।