rajnath singh

    रक्षा क्षेत्र की चुनौतियों को देखते हुए आयुध निर्माणी या आर्डिनेंस फैक्टरियों के कामकाज और व्यवस्था में व्यापक सुधार करने के उद्देश्य से उन्हें कॉरपोरेट कंपनियों में परिवर्तित करने का उचित निर्णय सरकार ने लिया है. इससे इन कंपनियों के काम का सही-सही वर्गीकरण या बंटवारा होगा. उनकी जवाबदेही तय होगी और मनमानी बिल्कुल नहीं चलेगी. उन्हें काम करके खुद को सिद्ध करना होगा. सरकार लंबे समय से आर्डिनेंस फैक्टरियों को कॉरपोरेट में तब्दील करने पर विचार कर रही थी तथा सारे पहलुओं पर काफी सोच-विचार के बाद यह निर्णय लिया गया. देश की 41 आयुध निर्माणियों का विलय 7 कॉरपोरेट कंपनियों में हो जाएगा. इन फैक्टरियों में कार्यरत लगभग 70,000 कर्मचारियों को इन कॉरपोरेट कंपनियों में समायोजित कर लिया जाएगा. प्रारंभ में इन्हें प्रतिनियुक्ति पर 2 वर्ष के लिए नई कंपनियों में भेजा जाएगा ताकि विशिष्ट कार्यशैली से अवगत हो सकें. यह उन कर्मचारियों के लिए उपयोगी होगा जो अब तक एक ही ढर्रे पर चलते रहे. आयुध निर्माणियों का कॉरपोरेट कंपनियों में विलय होने से ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड का अस्तित्व खत्म हो जाएगा.

    लाभ क्या होगा

    इस निर्णय से आयुध निर्माणियों की क्षमता में वृद्धि होगी तथा उत्पादन बढ़ेगा. साथ ही उत्पादों की लागत में कमी लाना भी संभव होगा. वह बाजार में अन्य देशी-विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धी भूमिका में आ सकेंगी. कॉरपोरेट शैली के प्रबंधन में विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी. इससे क्वालिटी और आउटपुट बढ़ेगा तथा विश्वस्तरीय उत्पादन व मार्केटिंग संभव होगी.

    कामकाज का वर्गीकरण

    अब हर कंपनी अलग-अलग किस्म का विशिष्ट उत्पादन करेगी. फैक्टरियों का समायोजन उनके कार्य के हिसाब से होगा कि वे अपने यहां क्या बनाती हैं. गोला-बारूद व विस्फोटक बनानेवाली फैक्टरियां एक कॉरपोरेट कंपनी में विलीन हो जाएंगी. वाहन समूह वाली दूसरी कंपनी में टैंक, लैंडमाइन या सुरंग रोधी वाहन बनाने वाली फैक्टरियां विलीन होंगी. तीसरा समूह छोटे, मध्यम व बड़े कैलिबर के हथियार व उपकरण बनानेवाली फैक्टरियों का होगा. चौथी कॉरपोरेट कंपनी सैनिकों से जुड़े साजोसामान (ट्रुप कंफर्ट आइटम) बनानेवाली होगी. यह विभिन्न मौसम की यूनिफार्म, बुलेटप्रूफ जैकेट, टेन्ट आदि बनाएगी. पांचवां समूह एन्सिलरी (सहयोगी या प्रतिपूरक) होगा. छठी कंपनी ऑप्टो इलेक्ट्रानिक्स, नाइट विजन व अन्य डिवाइस बनाएगी. सातवीं कंपनी पैराशूट ग्रुप की होगी. इस तरह सेना को सप्लाई की जाने वाली लॉजिस्टिक की व्यवस्था सुधर जाएगी.

    निर्यात स्तर की सामग्री का निर्माण

    विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा देखते हुए यह कदम जरूरी था. भारत सिर्फ अपने लिए ही हथियार नहीं बनाता, बल्कि उसका तमाम छोटे-बड़े देशों को निर्यात भी करता है. डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) द्वारा ईजाद या विकसित की गई प्रणाली को आयुध निर्माणी साकार रूप देती है और कड़े परीक्षण में खरा उतरने के बाद ही इनकी सेना को सप्लाई की जाती है.