Supreme court

    कोरोना प्रबंधन से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वैक्सीन की दोहरी कीमतों और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल प्रणाली से रजिस्ट्रेशन को लेकर केंद्र सरकार को फटकार सुनाई. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस रवींद्र भट की बेंच ने केंद्र से सवाल किया कि जिन ग्रामीण क्षेत्रों के लोग डिजिटल प्रणाली से अवगत नहीं हैं, उनके वैक्सीनेशन के लिए क्या किया जा रहा है? अदालत ने कहा, आप डिजिटल इंडिया-डिजिटल इंडिया कहते रहते हैं लेकिन ग्रामीण इलाकों के हालात अलग हैं. झारखंड के एक अशिक्षित मजदूर का राजस्थान में रजिस्ट्रेशन कैसे होगा? प्रवासी मजदूर क्या करेंगे? अदालत ने इस मुद्दे पर होश में आने की सलाह देते हुए सरकार से कहा- ‘वेक आप एंड स्मेल दि कॉफी!’ इसी तरह सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश भर में वैक्सीन के दाम एक समान रखे जाने चाहिए. जब केंद्र का दावा है कि ज्यादा मात्रा में वैक्सीन खरीदने पर उसे कम दाम चुकाने पड़ते हैं तो राज्यों को वैक्सीन के ज्यादा दाम क्यों देने पड़ रहे हैं?

    नीति स्पष्ट करने को कहा

    वैक्सीनेशन नीति में एकरूपता नहीं होने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रश्न किया कि क्या केंद्र की नीति यह है कि राज्य और महानगरपालिका अपने लिए वैक्सीन की व्यवस्था कर सकते हैं या फिर केंद्र नोडल एजेंसी के तौर पर उनके लिए वैक्सीन की व्यवस्था करेगी? पंजाब और दिल्ली अपने लिए वैक्सीन हासिल करने वैश्विक निविदा जारी कर रहे हैं. इस दोहरी नीति को लेकर केंद्र सरकार का क्या तर्क है? इस बारे में पॉलिसी स्पष्ट की जाए. न्या. चंद्रचूड ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-1 के अनुसार भारत एक गणराज्य है, इसलिए केंद्र को वैक्सीन हासिल कर राज्यों को बांटनी चाहिए. समूचे देश में वैक्सीन की एक ही कीमत होनी चाहिए.

    केंद्र सरकार का जवाब

    सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियों के बाद केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दाखिल किया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार जमीनी सच्चाइयों को नजरअंदाज नहीं कर रही है. कोई भी नीति पत्थर पर लिखी इबारत नहीं है. 2021 के अंत तक सभी पात्र व्यक्तियों का टीकाकरण पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह की मोहलत दी.