ममता आहत और कुपित, रोम जाने से केंद्र ने किया वंचित

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, न जाने क्यों बंगाल की सीएम और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को रोम जाने से रोक दिया गया? केंद्र सरकार के इस रवैये को लेकर आपकी क्या राय है?’’ हमने कहा, ‘‘केंद्र की बीजेपी सरकार सोचती है कि ममता को राम या रोम से क्या लेना-देना! जब वे ‘जय श्रीराम’ नारे से भड़क उठती हैं तो रोम जाकर क्या करेंगी? आपने गीत सुना होगा- मेरे रोम-रोम में बसने वाले राम, जगत के स्वामी ओ अंतरयामी मैं तुझसे क्या मांगूं.’’

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, ममता के मन में इतनी होप थी कि पोप की नगरी जाएंगी और विश्व शांति सम्मेलन में भाग लेंगी लेकिन केंद्र ने यह कहकर उन्हें इनकार कर दिया कि यह दौरा मुख्यमंत्री के लिए नहीं है. ममता के साथ हुए इस अन्याय को लेकर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी ही सरकार को घेरा है. उन्होंने सवाल किया कि ऐसा कौन सा कानून है जो ममता को वहां जाने से रोकता है?’’ हमने कहा, ‘‘बात केवल कानून की नहीं है, केंद्र की मर्जी भी महत्व रखती है. मोदी सरकार और बीजेपी मानती है कि ममता तेज-तर्रार और उग्र स्वभाव की हैं. वे जिस तरह बोलती हैं उससे लगता है कि वे बेहद उत्तेजित हैं और झगड़ा कर रही हैं. ममता के राज्य में हिंसा से बीजेपी चिंतित है. इसलिए केंद्र ने मान लिया कि ममता रोम में होने वाले शांति सम्मेलन के लिए उपयुक्त नहीं हैं. वे जोर-जोर से बोलकर शांति सम्मेलन में अशांति पैदा करेंगी.’’

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, ऐसा पूर्वानुमान नहीं लगाना चाहिए. भारत और रोम का बहुत प्राचीन संबंध रहा है. महान इतिहासकार डा. भगवतशरण उपाध्याय ने लिखा था कि मथुरा भारत के विदेश व्यापार का प्रमुख केंद्र हुआ करता था. मथुरा से रेशमी वस्त्र रोम भेजे जाते थे और बदले में वहां से सोना आया करता था. रोम का शाही परिवार और अभिजात्य लोग भारत के बने हुए रेशमी परिधान पहना करते थे. मथुरा और रोम के बीच प्राचीन सिल्क रूट था. रोम इटली की राजधानी है. यह संबंध आज भी बना हुआ है. सोनिया गांधी इटली से भारत आईं. वहां राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा का ननिहाल है. रोम का बस इतना ही हाल है.’’