समय रहते नियोजन के अभाव में त्योहारों के समय विद्युत संकट

    राष्ट्र के औद्योगिक विकास के लिए जरूरी 8 कोर सेक्टर्स में विद्युत का समावेश है. पावर सेक्टर से उद्योग ही नहीं, कृषि भी संलग्न है. उद्योगों के पहिए से लेकर कृषि की सिंचाई विद्युत पर ही निर्भर करती है. यह समझ पाना कठिन है कि अचानक इतना बड़ा देशव्यापी विद्युत संकट कैसे उत्पन्न हो गया. यद्यपि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने यह कहते हुए कि देश में कोयले की कोई कमी नहीं है, बिजली संकट की आशंका को गलत बताया, फिर भी हकीकत सामने है और इस पर लीपापोती नहीं की जा सकती. कोयले की कमी से काफी नाजुक स्थिति बनी हुई है.

    कई मुख्यमंत्री इस बारे में केंद्र सरकार को पत्र लिख चुके हैं. स्पष्ट है कि समय रहते सही नियोजन नहीं करने से देश कोई न कोई संकट भुगतता ही रहता है. कोयले की भारी कमी से महाराष्ट्र में विद्युत संकट उत्पन्न हो गया है. राज्य में थर्मल पावर की 13 इकाइयां बंद हो गई हैं. इनमें चंद्रपुर, भुसावल, नाशिक की 210-210 मेगावाट यूनिट, पारस की 250 मेगावाट, भुसावल व चंद्रपुर स्थित 500 मेगावाट की एक-एक यूनिट, अमरावती स्थित रतन इंडिया पावर लिमिटेड की 810 मेगावाट की 3 यूनिटें तथा गुजरात स्थित कोस्टल गुजरात पावर लिमिटेड की 640 मेगावाट की 4 यूनिटों का समावेश है. कुल 3,300 मेगावाट बिजली की पूर्ति ठप हो गई है. इसका सीधा असर उद्योग, कृषि तथा घरेलू उपयोग की बिजली पर आता है.

    क्या फिर होगा पावरकट

    बिजली की कमी को देखते हुए प्रशासन विद्युत कटौती पर विचार कर रहा है. महावितरण की ओर से नागरिकों से अपील की गई है कि वे सुबह 6 से 10 बजे तक और शाम को भी 6 से 10 बजे तक बिजली का उपयोग कम करें. यह कहा गया कि थर्मल प्लांटों में सिर्फ 2 दिन की बिजली उत्पादन के लिए ही कोयला बचा हुआ है. यदि कोयला सप्लाई में सुधार नहीं हुआ तो बिजली उत्पादन प्रभावित होने से राज्य में लंबा पावरकट लगाने की नौबत आ सकती है. देश के ज्यादातर बिजलीघरों में अब 4 दिन से भी कम का कोयला स्टाक बचा हुआ है.

    कोयला मंत्रालय का दावा

    कोयला मंत्रालय ने दावा किया कि थर्मल पॉवर प्लांट्स की मांग को पूरा करने के लिए देश में कोयले का पर्याप्त स्टॉक है. मंत्रालय ने यह बयान दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के इस आरोप के बाद जारी किया जिसमें कहा गया था कि केंद्र कोयला संकट की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहा है. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि दिल्ली के 3 बिजलीघरों के पास सिर्फ 1 दिन का कोयला स्टाक बचा है, इसलिए केंद्र सरकार थर्मल पावर प्लांट को कोयला व प्राकृतिक गैस की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करे. इस पर कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने ट्वीट किया कि विद्युत आपूर्ति में व्यवधान आने की कोई आशंका नहीं है. कोल इंडिया के पास 43 मिलियन टन कोयले का पर्याप्त स्टाक है. बिजलीघरों को सप्लाई के लिए पर्याप्त कोयला मौजूद है.

    भारी बारिश से सप्लाई कम हुई

    कोयले की कमी के बारे में कहा जा रहा है कि सितंबर में भारी वर्षा की वजह से कोयला सप्लाई में कमी आई. इसके पूर्व अप्रैल-जून तिमाही में कोयले का कम भंडारण हुआ. विदेश से मंगाए जानेवाले कोयले के दाम में तेजी से वृद्धि हुई. विदेशी कोयला अधिक ज्वलनशील होता है, इसमें राख कम निकलती है जिससे विद्युत उत्पादन में काफी उपयोगी रहता है. इस दौरान बिजली की मांग भी अचानक बढ़ी जो त्योहारों में, खासतौर पर दिवाली में और भी ज्यादा हो जाएगी. दिल्ली के अलावा पंजाब, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश ने भी कोयले की कमी की शिकायत की. भारत में 388 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता है, इसमें से थर्मल पावर प्लांट में 208.8 गीगावाट बिजली तैयार होती है.

    सिसोदिया ने ऑक्सीजन से तुलना की

    दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार कोयले की कमी की बात नहीं मान रही है. उसका रवैया वैसा ही है जैसा देश में ऑक्सीजन की कमी के समय था. तब भी केंद्र सरकार ऑक्सीजन की कमी स्वीकार नहीं कर रही थी. जुलाई से ही कोयले की कमी चल रही है जिससे यूपी, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश के संयंत्रों की विद्युत उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है.