Corona Death
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  • 3,688 नये पॉजिटिव
  • 3,227 को मिली छुट्टी
  • 80 प्रश रिकवरी रेट
  • 2,595 सिटी में संक्रमित मिले

नागपुर. मार्च का महीना खत्म होने को आया है और मरीजों की संख्या में दिनोंदिन वृद्धि होती जा रही है. स्थिति यह है कि शासकीय से लेकर निजी अस्पतालों में आईसीयू में बेड खाली नहीं है. मरीजों की लंबी वेटिंग चल रही है. अस्पताल परिसर में परिजनों की भीड़ डराने लगी है. कहीं, मौत होने पर परिजनों का गम है तो कहीं भर्ती नहीं करने के कारण रोष है. समूची सिटी में अब स्थिति बिगड़ गई है. इस बीच शनिवार को चौबीस घंटे के भीतर अब तक के सबसे अधिक 54 मरीजों की मौत हो गई.

जिले में चौबीस घंटे के भीतर 16,535 लोगों की जांच की गई. इसमें 3,688 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है. अधिकांश संक्रमित वहीं है जिनके परिजन पॉजिटिव आये हैं. कई घरों में सभी सदस्य पॉजिटिव आ रहे हैं, वहीं सपंर्क में आने वाले पड़ोसी भी पॉजिटिव निकल रहे हैं. 54 लोगों की मौत के साथ ही अब तक जिले में कुल 4,873 की मौत हो गई. कुल पॉजिटिव में सिटी के 2,595 संक्रमित मिले हैं. इस बीच 3,227 मरीजों को ठीक होने के बाद छुट्टी दी गई. फिलहाल जिले में एक्टिव मरीजों की संख्या 37,343 है. 

लॉकडाउन की करें समीक्षा

प्रशासन द्वारा पिछले दिनों से अलग-अलग व्यवस्था के तहत लॉकडाउन तो किया जा रहा है, लेकिन इसका खास लाभ होता नजर नहीं आ रहा है. इसकी मुख्य वजह न ही संक्रमित कम हो रहे हैं और न ही मरने वालों का आंकड़ा कम हो रहा है. यही वजह है कि अब प्रशासन को चाहिए कि लॉकडाउन की समीक्षा करें. साथ ही लॉकडाउन की पद्धति पर विचार करने की आवश्यकता महसूस हो रही है. प्रशासन द्वारा जीवनावश्यक के नाम पर बार एंड रेस्टोरेंट को शाम 7 बजे तक की राहत दे रखी है. 

भर्ती से लेकर मौत के बीच का करें अध्ययन 

इन दिनों देखने में आ रहा है कि मरने वाले मरीजों में उनकी संख्या अधिक है, जो सप्ताहभर से भर्ती थे. कई मरीज भर्ती होने से पहले ही गंभीर हो गये थे. भर्ती होने के साथ ही ऑक्सीजन और वेंटिलेटर भी जरूरत पड़ी. इस दिशा में भी अध्ययन की जरूरत है. आखिर मरीज अवस्था में ही क्यों भर्ती होने आ रहे हैं. इससे पहले उचित उपचार नहीं मिल रहा है क्या. इस पर भी विचार करना आवश्यक हो गया है.

नई भर्ती पर वेतन कम 

पिछले वर्ष प्रशासन ने निश्चित समय के लिए डॉक्टरों से लेकर नर्सों की नियुक्ति की थी. लेकिन बाद में जब कोविड कम हुआ था तो सेवा समाप्त कर दी थी. अब एक बार फिर मनपा प्रशासन द्वारा नियुक्ति की जा रही है, लेकिन पिछली दफा मिलने वाले मानधन से कम दिया जा रहा है. इस संबंध में शनिवार को कई डॉक्टरों और नर्सों ने जिलाधिकारी सहित मनपा आयुक्त से मुलाकात कर अधिक मानधन देने की मांग की. यदि अधिक मानधन नहीं दिया गया तो सेवा में शामिल होने से भी इंकार कर दिया है.

निजी अस्पतालों की मनमानी शुरू 

मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही एक बार निजी अस्पतालों की मनमानी शुरू हो गई है. निजी अस्पतालों में मनपा द्वारा 80 फीसदी बेड आरक्षित रखे गये हैं. इन बेड पर भर्ती होने वाले मरीजों के लिए मनपा ने प्रतिदिन के हिसाब से बेड चार्ज भी तय किया है. लेकिन मनपा के बेड खाली नहीं होने के नाम पर मरीजों से मनमानी शुल्क वसूला जा रहा है. सप्ताहभर भर्ती होने के बाद जब मरीज को छुट्टी दी जा रही है तो कुल बिल 3 लाख से 4 लाख निकाला जा रहा है.