तहसील में डेंगू जैसी बीमारी का प्रकोप, निजी क्लिनिक फुल

    अकोट. जबकि तहसील में कोरोना की लहर कम हो रही है. अब डेंगू, मलेरिया आदि बीमारियां घर-घर फैल रही हैं. जहां वर्तमान में सर्दी, बुखार, खांसी और शरीर में दर्द के मरीज मिल रहे हैं. वहीं स्वास्थ्य व्यवस्था की अनदेखी हो रही है, ऐसा दिख रहा है. शहर में गंदगी का बोलबाला है. और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है. 

    सरकारी और निजी अस्पतालों में भीड़ है. पिछले दो सप्ताह से तहसील में प्रकोप दिख रहा है. और रक्त परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में रोगियों की कतारें देखी गई हैं. जबकि शहर में संक्रमण के रोगियों की संख्या बढ़ रही है. नागरिकों में आक्रोश है क्योंकि संबंधित यंत्रणा इस संबंध में कोई उपाय नहीं कर रही हैं. बरसात के दिन शुरू है. साथ ही हर तरफ गंदगी का अंबार है.

    सड़क पर बने गड्ढो में बारिश का गंदा पानी जमा हो रहा है. मुख्य नालों और गली के नालों की समय पर सफाई न होने के कारण मच्छरों की संख्या भी बढ़ रही है. ऐसे समय में जब नगर परिषद प्रशासन को पूरे वार्ड में कीटनाशक का छिड़काव करना जरूरी है. लेकिन इसकी काफी हद तक अनदेखी की जा रही है. एक तरफ जहां सरकार स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है.

    वहीं नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग के समय की बर्बादी से ही नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खेल खेला जा रहा है. वर्तमान में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के निजी अस्पतालों में बड़ी संख्या में रोगियों का उपचार किया जा रहा है. और हालांकि डाक्टर आधिकारिक तौर पर डेंगू की पुष्टि नहीं करते हैं. कई लोगों के साथ डेंगू जैसा उपचार किया जा रहा है. तहसील में डेंगू जैसी बीमारी की स्थिति गंभीर होती जा रही है. लेकिन यंत्रणा खामोश है. 

    रोग को शरीर पर मत निकालो- डा. कैलाश जपसरे 

    वर्तमान में शहर में डेंगू जैसी बीमारियां पाई जा रही हैं. ऐसे में रोगी को अपने शरीर पर रोग नहीं लेना चाहिए. डाक्टर को दिखाना चाहिए और डाक्टर की सलाह के अनुसार अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए. अपने परिवार को बीमारी से बचाने के घरेलू उपाय, जैसे गुनगुने पानी का प्रयोग करें, टंकियों, गमलों में आठ दिन के ऊपर का जमा किया हुआ पानी का प्रयोग न करें, अपने आस-पास को साफ रखें. यदि पानी जमा होकर स्थिर है, तो उसमे मिट्टी का तेल या लिक्विड डालें. सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें. सभी को उचित सावधानी बरतनी चाहिए और आपसी उपचार का सहारा लिए बिना अपने पारिवारिक चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए.