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    कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन लगाने का असर यह हुआ कि सरकार को करों से होनेवाली आय घट गई. जब कल-कारखाने बंद हों, औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियां शिथिल हों तो रेवेन्यू कहां से मिल पाएगी? एक तरफ मांग घटी है तो दूसरी तरफ बेरोजगारी बढ़ी है. उद्योगों को छटनी करने पर मजबूर होना पड़ा. अर्थव्यवस्था में शिथिलता आई है. समूचा देश और देश की आर्थिक राजधानी कहलानेवाली मुंबई भी इसका अपवाद नहीं है.

    ऐसी विषम स्थिति में वित्त विभाग ने वित्तीय आय में कमी का कारण बताते हुए राज्य के प्रत्येक मंत्रालय को बजटीय प्रावधान का सिर्फ 60 प्रतिशत धन उपलब्ध कराने की बात कही है. इतनी ही निधि में राज्य का हिस्सा, वेतन और पोषण आहार का खर्च वहन करना होगा. कोरोना की स्थिति से निपटने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य, मेडिकल एजुकेशन, खाद्यान्न व नागरी आपूर्ति, राहत व पुनर्वास जैसे मंत्रालयों को प्राथमिकता दी जाएगी.

    जलसंकट निवारण और रोजगार गारंटी के कार्यों, विधायक निधि व जिला वार्षिक योजनाओं पर कोई पाबंदी नहीं है. इसके अलावा कोई भी मंत्रालय किसी भी प्रकार की खरीदारी नहीं कर सकेगा. जिन योजनाओं के लिए खर्च अत्यावश्यक है उन्हीं को निधि दी जाएगी. यदि कोई योजना अदालत के आदेश पर बनाई जा रही है तो मौजूदा आर्थिक स्थिति के बारे में अदालत को बताया जाए और अदालत की अनुमति से उसे बंद या स्थगित करने का निर्णय लिया जाए.