जनता पर महंगाई का प्रहार, रेलवे के बाद ST के किराए में बढ़ोतरी

    पहले ही भीषण महंगाई की मार से जनता छटपटा रही है लेकिन उसे कोई राहत देना तो दूर, हर प्रकार से लूटकर उसका जीना दूभर किया जा रहा है. यह तौर तरीका कल्याणकारी राज्य या वेल्फेयर स्टेट की संकल्पना के खिलाफ है. ऐसा लगता है कि शासन को लोगों के दु:ख दर्द से कोई मतलब नहीं है. बस सामान्य आदमी के कपड़े उतार लेना बाकी रह गया है. कोरोना संकट में कितने ही लोग नौकरी-रोजगार से हाथ धो बैठे. गरीब और मध्यम वर्ग की दुर्दशा कायम है. 

    ऐसे में उसे दिलासा देना तो दूर, महंगाई की चक्की में बुरी तरह पीसा जा रहा है. रेलवे ने अपना प्रवास महंगा कर दिया तो उसी के नक्शे कदम पर चलते हुए महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम (एसटी) ने भी बस किराया बढ़ा दिया. ऐन दिवाली जैसे त्योहार के समय जब लोग सपरिवार अपने गांव जाना चाहते हैं, उनकी जेब पर ज्यादा भार पड़ेगा. एसटी ने 3 महीने पहले  राज्य सरकार को टिकट दर बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था जिसे सरकार ने अब हरी झंडी दे दी. राज्य भर में एसटी बसों की टिकट दर में 17 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई. किराया 21 पैसा प्रति किलोमीटर बढ़ाया गया है. 

    बस किराए में एक झटके में इतनी वृद्धि करने से सीमित आय वाले लाखों लोगों को भारी परेशानी होगी. जो लोग आसपास के गांव से नौकरी के लिए रोज आना-जाना करते हैं, उनका मासिक पास भी महंगा हो जाएगा. विद्यार्थियों को भी बढ़े हुए किराए का बोझ उठाना पड़ेगा. एसटी की दलील है कि पिछले 1 वर्ष से परिवहन बसें घाटे में चल रही हैं जिसके कारण वह अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन दे पाने में असमर्थ है. लॉकडाउन के दौरान बसों से प्रवास प्रभावित हुआ. 

    छूट देने पर भी आधी क्षमता से चार्ज लिए गए. इस दौरान पेट्रोल, डीजल के दाम बेतहाशा बढ़े हैं और लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं. डीजल के दाम के शतक लगाने से सार्वजनिक परिवहन की दरों में वृद्धि अपरिहार्य हो गई. कारण चाहे जो भी हों यह किराया वृद्धि जनता को परेशान और हतोत्साहित करने वाली है.