लखीमपुर कांड में नया मोड़, SIT जांच में मंत्री के बेटे पर कसा शिकंजा

    जब एसआईटी रिपोर्ट में खुलासा हो गया है कि लखीमपुर खीरी की घटना पूर्व नियोजित थी और मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा उर्फ मोनू ने ही आंदोलनकारी किसानों को गाड़ी से कुचलकर मारा था तो उसके पिता अजय मिश्रा टेनी को स्वयं केंद्रीय गृह राज्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. वे इतने दिनों से क्यों इस पद पर बैठे हैं और प्रधानमंत्री मोदी ने अब तक क्यों नहीं उन्हें बर्खास्त किया? 

    जब दबंग प्रवृत्ति और अत्याचारी मानसिकता वाले लोग सत्ता में ऊंचा पद पा लेते हैं तो उनके परिजन भी स्वच्छंद हो जाते हैं. उन्हें लगता है कि वे देश के कानून से ऊपर हैं. यह संतोष का विषय है कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की और जांच अधिकारी (इन्क्वायरी आफिसर) की अर्जी पर गौर करते हुए अदालत ने आशीष मिश्रा सहित सभी आरोपियों पर गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से गाड़ी चलाने की धारा हटाकर एकमत से हत्या के प्रयास और लाइसेंसी हथियार के दुरुपयोग की धारा लगाने को मंजूरी दे दी. 

    इसके बाद आशीष मिश्रा समेत सभी आरोपियों पर आपराधिक साजिश के तहत हत्या और हत्या का प्रयास की धारा में वारंट बना दिया गया. अब आरोपों का स्वरूप ज्यादा गंभीर हो गया है. कोर्ट में क्या फैसला होगा, यह अलग बात है. आशीष मिश्रा के वकील ने तो यह दावा किया है कि पुलिस द्वारा हत्या बताए जाने से उनका काम आसान हो गया है. आशीष के खिलाफ हत्या का कोई सबूत नहीं है. गोली किसी को लगी नहीं, सभी लोग कुचले जाने से मरे हैं. 

    पुलिस गैर इरादतन हत्या का आरोप नहीं लगा पाई क्योंकि हत्या करने वाला थार जीप का ड्राइवर मर गया, इसलिए अब पुलिस ने मर्डर का चार्ज लगा दिया. कांग्रेस ने इस मामले में आक्रामक रुख अपनाया है. राहुल गांधी ने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट से साफ है कि आरोपी केंद्रीय मंत्री का बेटा ही था. इस खुलासे के बावजूद केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा का पद पर बने रहना दुखदायी है. नैतिकता के नाते उन्हें तत्काल पद छोड़ देना चाहिए. प्रियंका गांधी ने हत्याकांड में अजय मिश्रा की भूमिका की भी जांच की मांग करते हुए कहा कि उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए.