दिल्ली में महाराष्ट्र के मुद्दों पर सिर्फ फडणवीस की सुनी जाती है

    केंद्र की मोदी सरकार के लिए यदि महाराष्ट्र में कोई आंख और कान का काम करते हैं तो वे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और फिलहाल नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस ही हैं. एक समय चर्चा चली थी कि फडणवीस जैसे युवा नेता को दिल्ली बुलाकर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है लेकिन बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने माना कि महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से प्रतिपक्ष के नेता के रूप में ही देवेंद्र अधिक उपयोगी है. 

    महाराष्ट्र से संबंधित किसी भी मुद्दे पर फडणवीस की सुनी जाती है. उनके सुझाव पर गौर कर उपयुक्त निर्णय लिया जाता है. यह एक बड़ी सफलता और उपलब्धि है कि फडणवीस के सुझाव के बाद केंद्र सरकार ने आदेश जारी किया कि अब महाराष्ट्र के शक्कर कारखानों को आयकर नोटिस नहीं दिया जाएगा. इस उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 2016 के अपने कानून में परिवर्तन कर महाराष्ट्र के शुगर मिल संचालकों को राहत प्रदान की है. 

    आयकर विभाग द्वारा मराठवाडा और विदर्भ के कुछ शक्कर कारखानों का निरीक्षण करने के बाद किसानों को एमआरपी से अधिक दर दी गई रकम को कारखाने का लाभ समझ कर उस पर आयकर लगाना शुरु कर दिया था. 1992-93 से देश भर के कारखानों को बार-बार नोटिस भेजे जा रहे थे जिसकी वजह से यह रकम बढ़कर 3,000 करोड़ रुपए से भी अधिक हो गई थी. इस तरह के नोटिसों पर अब केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है. केंद्र ने इसके लिए राज्य प्राधिकरण और अन्य कानूनी मार्च उपलब्ध करा दिए हैं. 

    फडणवीस ने बताया कि किसानों को गन्ने की अधिक दर दिए जाने से करखानों को नोटिस आ रही थी. सुप्रीम कोर्ट में भी कई मामले लंबित थे. इस विषय को लेकर एक प्रतिनिधि मंडल ने हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. इन दरों को देते समय सक्षम प्राधिकरण के मान्यता ली गई थी लेकिन फिर भी कारखानों को नोटिस मिलते रहे. फडणवीस ने बताया कि 2016 के बाद के आयकर को अब रद्द कर दिया गया है लेकिन उसके पहले वाले कर के लिए संसद की मंजूरी लेनी होगी. निश्चित रूप से इस विषय में फडणवीस के प्रयासों को सफलता मिली.