अतिवृष्टि का प्रकोप, राज्य में फसलों को भारी नुकसान

    प्रकृति का प्रकोप किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर देता है. कभी सूखा पड़ता है तो कभी अतिवृष्टि का संकट उनका सब कुछ छीन कर उन्हें मोहताज बना देता है. मराठवाड़ा के जिलों में कुछ वर्ष पूर्व ऐसा सूखा पड़ा था कि वहां ट्रेनों से पानी पहुंचाने की नौबत आ गई थी. 

    इस बार मराठवाडा के औरंगाबाद बीड, नांदेड जिलों और उत्तर महाराष्ट्र में गत सप्ताह से हो रही भारी वर्षा और बाढ़ की वजह से खरीद की फसलों को सर्वाधिक क्षति पहुंची. कपास, गन्ना, बाजरा व सोयाबीन की फसलों का अतिवृष्टि में तबाह कर दिया. उत्तर महाराष्ट्र के धुलिया सहित अन्य जिलों में केले, कपास व मक्के की फसल अतिवृष्टि से बरबाद हो गई. विदर्भ में भी अतिवृष्टि से नुकसान हुआ. 

    नागपुर, भंडारा, यवतमाल वर्धा, अमरावती में खड़ी फसलों की काफी क्षति हुई. राज्य में अगले सप्ताह 13 से 15 सितंबर के बीच तथा उसके बाद भी भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने व्यक्त की है. किसान पहले ही गरीबी व अभाव से घिरे हुए हैं. उनके बीच, खाद, कीटनाशक के खर्च तथा कृषि की अन्य लागत व मेहनत को प्रकृति का कोप मटियामेट कर देता है. 

    ऐसे में पहले ही कर्ज के बोझ से दबे किसान लुट-पिट कर रह जाते हैं. जुलाई- अगस्त में हुई क्षति वर्षा की वजह से राज्य में 5 लाख हेक्टेयर खेती का नुकसान हुआ है. विभिन्न जिले में क्षति के नुकसान का पंचनामा होने पर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है. अतिवृष्टि से फसलों के अलावा मकान का ढहना तथा जनहानि भी हुई है. 

    गत 3 महीनों में अतिवृष्टि व बाढ़ की वजह से 401 लोगों की मृत्यु हुई व सातारा जिलों में भूस्खलन से लोग मारे गए. चक्रवात आने से तेल व प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) का पी-305 बार्ज डूबने से 77 लोगों की मृत्यु हुई थी. मराठवाड़ा व खानदेश में मूसलाधार बारिश से 30-35 लोगों की मौत हुई. सहायता व पुनर्वसन विभाग के अनुसार यह आंकड़ा और बढ़ सकता है. पीड़ित परिवार सरकार व प्रशासन से राहत की आशा कर रहे हैं.