टिकट न मिलने पर साध्वी उमा भारती का आक्रोश

    पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती भड़की हुई हैं क्योंकि राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें मध्यप्रदेश से टिकट नहीं दिया और उन्हें दरकिनार कर केंद्रीय राज्यमंत्री अल मुरुगन को उम्मीदवार बना दिया. उमा अपनी ही पार्टी से खफा हैं और उन्होंने मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के खिलाफ मुहिम छेड़ दी. उमा भारती ने कहा कि यदि मध्यप्रदेश सरकार ने शराब बंदी का एलान नहीं किया तो वह 15 जनवरी से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगी. 

    नमामि गंगे प्रोजेक्ट में उनकी विफलता के बाद उन्हें मंत्री पद खोना पड़ा क्योंकि पीएम मोदी को वही मंत्री भाते हैं जो काम करके दिखाते हैं. सिर्फ उमा ही नहीं, बल्कि मोदी ने अपनी पहली टर्म में 2014 में जिन लोगों को मंत्री बनाया था, उनमें से कई को 2019 में दोबारा मौका नहीं दिया. उमा भारती ने अपना आखिरी चुनाव 2014 में झांसी से लड़ा था. जरूरी नहीं है कि जो नेता आक्रामक व आंदोलनकारी तेवर दिखाए, वह कुशल मंत्री भी साबित हो. 

    उमा भारती ने फिर एक बार विवाद खड़ा करते हुए नौकरशाही (ब्यूरोक्रेसी) की तथाकथित शक्ति पर सवाल उठाया है. उमा भारती ने भोपाल के अपने आवास में ओबीसी कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान नौकरशाही के बारे में जो टिप्पणी की, वह अपमानजनक मानी जाती है. वायरल हो रहे वीडियो में उमा भारती ने कहा कि नौकरशाही की औकात ही क्या है! वे हमारी चप्पल उठाते हैं और हम उन्हें वेतन देते हैं, पोस्टिंग देते हैं. इसलिए वे कुछ भी नहीं हैं. यह गलतफहमी है कि नौकरशाह नेताओं को गुमराह करते हैं. 

    आपको क्या लगता है कि ब्यूरोक्रेसी नेता को घुमाती है? नहीं-नहीं. पहले अकेले में बात हो जाती है, हमसे सलाह ली जाती है, फिर ब्यूरोक्रेसी फाइल बनाकर लाती है. मैं 11 साल केंद्रीय मंत्री और सीएम रही हूं. मुझे पता है कि नौकरशाह कैसे व्यवहार करते हैं और उनकी औकात क्या है. इस बयान का वीडियो वायरल होने पर उमा भारती ने ट्वीट कर लिखा- ‘मुझे रंज है कि मैंने असंयत भाषा का इस्तेमाल किया जबकि मेरे भाव अच्छे थे. 

    मैंने यह सबक सीखा कि सीमित लोगों के बीच अनौपचारिक बातचीत में भी संयत भाषा का प्रयोग करना चाहिए.’ उमा भारती चाहे जो कहें, यह तथ्य है कि काबिल ब्यूरोक्रेट ही प्रशासनिक मशीनरी को चलाते हैं और सरकार की नीतियों व योजनाओं को अमली जामा पहनाते हैं. मंत्री अस्थायी होते हैं लेकिन प्रशासन स्थायी होता है. सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो, वह ब्यूरोक्रेसी पर निर्भर रहती है. कानूनों व महत्वपूर्ण दस्तावेजों की ड्राफ्टिंग भी ब्यूरोक्रेट ही करते हैं. चप्पल उठाने की बात कहना उनका अपमान है.