बिजली सप्लाई की दुर्दशा

सचमुच आश्चर्य की बात है कि देश की आजादी के 73 वर्ष बाद भी देश के कितने ही गांव बिजली की रोशनी से वंचित हैं. कौंसिल आफ एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर द्वारा कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई कि देश के दो-तिहाई गांवों तथा 40 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में दिन में कम से कम एक बार बिजली सप्लाई खंडित होती है. विद्युत वितरण और ट्रांसमिशन में आने वाली तकनीकी दिक्कतों, बिजली चोरी तथा बिजली कंपनियों को होने वाले नुकसान जैसे कारणों से अनेक स्थानों पर 24×7 बिजली उपलब्ध नहीं हो पाती. देश की एक-तिहाई जनता विद्युत सप्लाई के संकट से जूझ रही है. इसके अलावा वोल्टेज कम-ज्यादा होने से बिजली सप्लाई खंडित होती है.

इस वजह से घरों के उपकरण जैसे टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, मिक्सर ग्राइंडर वगैरह खराब हो जाते हैं और लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है. विद्युत उपभोक्ताओं में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता नहीं है इसलिए केवल 6 प्रतिशत ग्राहक ऐसे मामलों की संबंधित विभाग में शिकायत करते हैं. यद्यपि भारत विश्व के सर्वाधिक विद्युत निर्माण करने वाले देशों की सूची में तीसरे स्थान पर है तथा सरकार व राजनीतिक पार्टियां भी 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का आश्वासन देती हैं परंतु ऐसा हो नहीं पाता. देश के 21 राज्यों के 152 जिलों के 15,000 से अधिक घरों में किए गए सर्वेक्षण से यह बात सामने आई कि अधिकांश देशवासी बिजली की कटौती के संकट से जूझ रहे हैं. कभी लोडशेडिंग के नाम पर तो कभी मेंटनेंस के बहाने बिजली गुल रखी जाती है. सर्वे में शामिल 76 प्रतिशत लोगों के घर में अनेक बार बिजली सप्लाई खंडित होती है. जिन राज्यों में कई घंटे तक बिजली चली जाती है उनमें उत्तरप्रदेश पहले नंबर पर है. इसके बाद झारखंड, असम, बिहार व हरियाणा का नंबर आता है.

इन राज्यों में बिजली आंख मिचौनी का खेल खेलती है और दिन-रात में कई बार आती-जाती रहती है. दूसरी ओर बिजली चोरी करने वालों की भी कमी नहीं है. कुछ बस्तियों में लोग तार पर हुक डालकर बिजली चोरी करते हैं. कुछ शातिर लोग मीटर में  छेड़छाड़ से ऐसा करते हैं. इसका नुकसान ईमानदार उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है. समय पर बिल नहीं भरने से बिजली कंपनियों को नुकसान होता है. ग्रिड के माध्यम से होने वाली बिजली सप्लाई के 4 प्रतिशत ग्राहकों के बिलों में अनियमितता होती है. कभी मीटर तेजी से चलने की शिकायत मिलती है. ग्रिड से बिजली सप्लाई वाले ग्राहकों में से 5 प्रतिशत का दावा है कि उनके यहां कभी बिजली बिल आया ही नहीं. झारखंड में बिजली बिलों का भुगतान 55 प्रतिशत और बिहार में 64 प्रतिशत कम है. यूपी, मध्यप्रदेश व असम में भी बिल भरने वालों की संख्या कम है.