टेक्नोलॉजी का मजा ऑनलाइन पूजा में नहीं कोई दूजा

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, जिन लोगों की लाइन कभी बिगड़ी हुई थी या जो कहते थे कि हम जहां खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है, वे अब ऑनलाइन हो गए हैं. यह उस संगणक की वजह से हुआ है जिसे आप अमिताभ बच्चन के शब्दों में कंप्यूटर जी और ‘कौन होणार करोड़पति’ मराठी में पेश करने वाले सचिन खेड़कर के शब्दों में कंप्यूटर राव कह सकते हैं.’’ हमने कहा, ‘‘ऑनलाइन रहनेवालों को कभी नहीं कहना पड़ता कि पानी पीना छान के और गुरु बनाना जान के! वे सभी गूगल गुरु की शरण में हैं.

    वर्चुअल वर्ल्ड या आभासी दुनिया में रहना उन्हें पसंद है. पूजा-आराधना और अध्यात्म के क्षेत्र में कंप्यूटर और मोबाइल अनूठा स्थान पा गए हैं. लक्ष्मी पूजन में समय पर आरती याद न आए तो मोबाइल काम आता है. जितनी चाहो उतनी आरतियां मिल जाएंगी.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, कोरोना काल में पंडित उपलब्ध न हो तो संपूर्ण पूजा-विधि कंप्यूटर या मोबाइल से ऑनलाइन पूरी करवा दी जाती है. भगवान का फोटो उपलब्ध नहीं हो तो कोई चिंता की बात नहीं! ऑनलाइन अष्टविनायक और देवी का दर्शन कर लीजिए. घर बैठे शिरडी के साईंबाबा, कोल्हापुर की महालक्ष्मी, पुणे के दगडू शेठ के गणपति, मुंबई के सिद्धिविनायक की आरती में सम्मिलित हो जाइए.

    विज्ञान और अध्यात्म का कितना सुंदर सम्मिलन है! अयोध्या में राम हैं तो कंप्यूटर में भी आरएएम (राम या रैम) की मौजूदगी है. जिस तरह अपने वाहन मूषक पर सवार होकर गणपति समस्त ब्रह्मांड का विचरण करते हैं, वैसे ही माउस की एक क्लिक से कंप्यूटर पर भी पूरी दुनिया पर नजर रख सकते हैं. आप भले ही स्मार्ट न हों लेकिन स्मार्ट पूजा डॉट काम आपकी पूरी मदद कर सकता है. गणेश की स्पेलिंग जी से है तो वही अक्षर 4जी में भी विद्यमान है. आप जूम पर भगवान की तस्वीर देखकर झूम उठेंगे. आपके घर में भले ही स्पेस कम हो लेकिन साइबर स्पेस असीमित है.’’ हमने कहा, “आपके पास शंख न हो तो पूजा में शंख या ढोल की ध्वनि स्पीकर या हेडफोन पर सुन लीजिए. यह सब भक्तों को कलियुग में दिया गया प्रभु का प्रसाद है जो हमारे पूर्वजों के समय नहीं था.’’