बगैर अधिकार किस काम का लोकायुक्त पद आखिर किस मर्ज की दवा

क्या कुछ पद महज औपचारिकता के लिए बनाए जाते हैं या जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए? जब पद के साथ कोई पॉवर या अधिकार ही नहीं होगा तो उसकी क्या उपयोगिता? ऐसा पद बनाकर सरकार जनता के पैसे का दुरुपयोग कर रही है. 2013 में बने लोकपाल व लोकायुक्त  (Lokayukta) कानून के तहत केंद्र के लिए लोकपाल और राज्यों के लिए लोकायुक्त की व्यवस्था की गई है. ये संस्थाएं बगैर किसी संवैधानिक दर्जे वाले वैधानिक निकाय हैं जो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करते हैं. यहां तक तो ठीक है परंतु इसके बाद लोकायुक्त की रिपोर्ट पर आगे कोई कार्रवाई नहीं होती. यह कितनी हताशाजनक स्थिति है! गोवा में लगभग साढ़े चार वर्ष तक लोकायुक्त रह चुके रिटायर्ड जज प्रफुल्लकुमार मिश्रा (Lokayukta Justice (Retired) Prafulla Kumar Misra)ने इस व्यवस्था को ही खत्म करने की मांग की है.

राज्य सरकार के रवैये से असंतुष्ट जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने कई अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ 21 रिपोर्ट दीं लेकिन राज्य सरकार ने एक भी रिपोर्ट पर एक्शन नहीं लिया. ऐसे में तो कोई भी नेता या अफसर लोकायुक्त से डरे बिना भ्रष्टाचार करेगा. राज्य सरकार के रवैये से मोहभंग हो जाने के कारण गोवा छोड़ देने वाले जस्टिस मिश्रा ने कहा कि लोकायुक्त व्यवस्था में कुछ कमियां हैं. कर्नाटक और केरल के अधिनियमों में लोकायुक्त को अभियोग दायर करने की शक्तियां दी गई हैं लेकिन गोवा में ऐसा नहीं है. गोवा में लोकायुक्त के आदेशों की अवहेलना करने पर अवमानना का कोई प्रावधान नहीं है जो इस अधिनियम को कमजोर करता है. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि उन्होंने जिन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दी थी उनमें एक पूर्व मुख्यमंत्री और एक मौजूदा विधायक भी है.

अपने अधिकारविहीन पद से हताश होकर मिश्रा ने कहा कि शिकायतों से निपटने का मेरा अनुभव देखते हुए मैं यही कहूंगा कि लोकायुक्त की संस्था को समाप्त कर देना चाहिए. जनता के पैसे को क्यों बिना मतलब खर्च किया जा रहा है? यदि लोकायुक्त अधिनियम को कूड़ेदान में डाला जा रहा है तो इस पद को खत्म करना ही बेहतर है. जस्टिस मिश्रा की इस नाराजगी भरी स्पष्ट और तीखी टिप्पणी के बाद केंद्र तथा गोवा सरकार को सचेत हो जाना चाहिए व लोकायुक्त पद को केवल शोभा की वस्तु न बनाते हुए उसे सचमुच में उपयोगी और अधिकारसंपन्न बनाना चाहिए. ऐसा दिखावटी पद किस काम का, जिसकी सार्थकता ही न हो!