सरकारी कर्मी करते आराम फाइल को दबाना ही मुख्य काम

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, आप किसी भी सरकारी कार्यालय में जाइए, आपको वहां फाइलों का अंबार लगा दिखाई देगा. ये ऐसी फाइलें हैं जो लगातार पेंडिंग पड़ी हैं और जिन्हें निपटाने के प्रति कोई गंभीर नहीं है. यह हालत वाकई चिंताजनक है.’’ हमने कहा, ‘‘फाइल को दबाना ही सरकारी बाबुओं और अफसरों का मुख्य कार्य है. जब उन्हें फिक्र नहीं है तो आप क्यों चिंतित हो रहे हैं? कहा गया है- चिंता से चतुराई घटे, दुख से घटे शरीर! कुछ सरकारी कर्मचारी फाइल पर कुंडली मारकर बैठ जाते हैं और हिलने का नाम भी नहीं लेते.’’ 

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, ऐसी सुस्ती और लापरवाही की वजह से देश आगे नहीं बढ़ता. आलसी और निकम्मे कर्मचारियों व अधिकारियों की मानसिकता होती है- आज करे सो काल कर, काल करे सो परसों, ऐसी जल्दी क्या पड़ी, अभी तो जीना है बरसों!’’ हमने कहा, ‘‘सिस्टम इतना भ्रष्ट है कि पैसों का वजन रखो तो फाइल आगे बढ़ने लग जाती है, वरना 1 सेंटीमीटर भी नहीं सरकती. किसी दफ्तर में जाओ तो कहा जाता है कि आज बाबू छुट्टी पर है. कभी कहते हैं कि जिस चपरासी के पास रिकार्डरूम की चाबी है, वह अवकाश पर है. सब कुछ ठीक हुआ तो कहते हैं कि साहब दौरे पर गए हैं इसलिए फाइल पर दस्तखत नहीं हो सकते. मामला कहीं न कहीं जाकर अड़ जाता है. कभी-कभी महत्वपूर्ण फाइल गुम हो जाती है, तब कहना पड़ता है- तू छुपी है कहां, मैं तड़पता यहां!’’

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, अब ऐसी धांधली नहीं चलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर अगले माह से एक अनोखी स्वच्छता मुहिम चलाई जाएगी जिसके तहत लंबित शिकायतों से जुड़ी और पुरानी फाइलें निपटाई जाएंगी. उन पर तुरंत फैसला करना पड़ेगा. संसद में मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासनों को संबंधित मंत्रालयों को हर हालत में 31 अक्टूबर से पहले पूरा करना होगा. इस डेडलाइन को ध्यान में रखते हुए गांधी जयंती से यह काम शुरू कर दिया जाएगा. इसके अलावा कैबिनेट सचिव ने भी कहा है कि जहां तक संभव हो, अनावश्यक कागजी कार्रवाई से बचा जाए. जब कंम्प्यूटर पर फटाफट काम हो सकता है तो नो पेपर वर्क!’’