किसान आंदोलन पर चर्चा ब्रिटिश संसद को कोई हक नहीं

    भारत का किसान आंदोलन (Indian Farmers Protest) कोई अंतरराष्ट्रीय मुद्दा या समस्या नहीं है जिस पर ब्रिटिश पार्लियामेंट (UK Parliament) में चर्चा की जाए. यूपीए सरकार में विदेश राज्यमंत्री रह चुके शशि थरूर (Shashi Tharoor) की यह दलील किसी के गले नहीं उतरेगी कि यदि हम भारत में फिलीस्तीन-इजराइल के मुद्दे पर चर्चा करते हैं तो उसी तरह ब्रिटिश संसद के पास भी वही हक है कि वह किसान आंदोलन पर चर्चा करे. थरूर को समझना चाहिए कि भारत के किसानों का आंदोलन इसी देश का आंतरिक प्रश्न है.

    किसी अन्य देश की संसद इस पर चर्चा करती है तो यह उसकी अनाधिकार चेष्टा ही कहलाएगी. जब आयरलैंड और इंग्लैंड का विवाद चल रहा था और आयरिश रिपब्लिकन आर्मी सक्रिय थी तब भारत की संसद में इसे लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी. यूएन में अंडर सेक्रेटरी रह चुके शशि थरूर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का फर्क पहचानना चाहिए. भारत की संप्रभुता सर्वोच्च है. किसी अन्य देश की संसद को यहां के किसान आंदोलन पर बहस करने का दूर-दूर तक कोई अधिकार नहीं है.

    जहां तक फिलीस्तीन को समर्थन था. फिलीस्तीन मुक्ति मोर्चा के प्रमुख यासर आराफात को इंदिरा गांधी (Indira Gandhi)  ने समर्थन दे रखा था. आज राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं और बीजेपी शासन में इजराइल से भारत की मित्रता और सहयोग काफी अधिक बढ़ गया है. जहां तक किसान आंदोलन का मुद्दा है, ब्रिटेन या कनाडा की संसद को इस मुद्दे पर चर्चा का कोई अधिकार नहीं है. भारत एक स्वतंत्र सार्वभौप्रदेश ही नहीं आबादी के लिहाज से विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. हम तो कश्मीर मुद्दे को भी भारत-पाक का द्विपक्षीय मामला मानते हुए किसी बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करते हैं.