तनाव के बाद पाठ्यक्रम से गोलवलकर, सावरकर का चैप्टर हटाना पड़ा

    हिंदुत्ववादी विचारधारा लादने के चौतरफा विरोध के बाद आखिर केरल के कन्नूर विश्वविद्यालय ने आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर से जुड़ा चैप्टर वापस ले लिया. विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में ‘हिंदुत्व’ शीर्षक से यह अध्याय शामिल किया गया था जिसमें गोलवलकर की पुस्तक बंच आफ थाट्स, वी एंड अवर नेशनहुड डिफाइंड, वीर सावरकर की पुस्तक हिंदुत्व : हू इज ए हिंदू के अंश शामिल थे.

    इसके अलावा दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद भी शामिल था. केरल के सरकारी ब्रेनेन कालेज में इसकी पढ़ाई शुरू की गई जिसका पता लगने पर केरल स्टुडेंट्स यूनियन, इंडियन युनियन मुस्लिम लीग व मुस्लिम स्टुडेंट्स फेडरेशन ने विरोध प्रदर्शन किया और पाठ्यक्रम की प्रतियां जलाईं. कन्नूर यूनिवर्सिटी के शिक्षक प्रो. रवींद्रन की दलील थी कि सावरकर और गोलवलकर क्या सोचते थे, यह हमारी राजनीति का हिस्सा है.

    हमने गांधी, नेहरू, आंबेडकर, टैगोर के विचारों को भी शामिल किया है छात्रों को इन सभी के बारे में पढ़ना चाहिए. विरोधियों ने आरोप लगाया कि आरएसएस समर्थक शिक्षा संस्थाओं में भगवा एजेंडा लागू कर रहे हैं. ऐसा हम होने नहीं देंगे. वैसे देखा जाए तो विभिन्न विश्वविद्यालयों में हिंदू पोलिटिकल थाट में तिलक व गांधी की विचारधारा पढ़ाई जाती है. इसी में सावरकर व गोलवलकर को भी शामिल किया गया है.