पद की गरिमा के खिलाफ गवर्नर के बोल

  • ऐसे मसले पर राष्ट्रपति निर्णय लें

राज्यपाल किसी राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है. यह एक शोभा एवं मान-सम्मान का पद है जिसकी गरिमा बनाए रखने के प्रति स्वयं राज्यपाल को सचेष्ट रहना चाहिए. इस पद पर विराजमान व्यक्ति से संयम और मर्यादा की सहज अपेक्षा की जा सकती है. राज्यपाल दलगत राजनीति से ऊपर रहें तथा सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री के कार्य या अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप न करें, इसी में इस पद की सार्थकता है. लगता है कि राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) आज भी अपने अतीत से चिपके हुए हैं जब वे उत्तराखंड की बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री थे. तब उन्हें सक्रिय राजनीति करने व बीजेपी के हित साधने का अधिकार था, राज्यपाल बनने के बाद उन्हें इस तरह की स्वतंत्रता बिल्कुल भी नहीं है. वे महाराष्ट्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जा ही नहीं सकते. यहां तक कि विधान मंडल सत्र में अभिभाषण पढ़ते हुए भी उन्हें बार-बार यही कहना पड़ता है कि मेरी सरकार ने यह फैसला लिया या कदम उठाया है. इसलिए सरकार के लिए अनिवार्य रूप से उन्हें प्रतिबद्धता दर्शानी पड़ती है. वे सरकार की नीति या निर्णय से अपनी असहमति या भिन्न राय व्यक्त कर ही नहीं सकते. इतना सब जानने-समझने के बावजूद राज्यपाल कोश्यारी को क्या पड़ी थी कि उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को तंज करने वाली चिट्टी लिखी? गवर्नर ने सिर्फ कोरोना की वजह से बंद पड़े धर्मस्थलों को खोलने का अनुरोध नहीं किया, बल्कि सीएम पर तंज कसते हुए कहा कि क्या आपको  ईश्वर की ओर से कोई चेतावनी मिली है कि धर्मस्थलों को खोले जाने को टालते रहा जाए या फिर आप अचानक ‘सेक्यूलर’ (Secular) हो गए हैं जिस शब्द से आपको नफरत थी?

इन चुभने वाले उद्गारों पर ही राज्यपाल नहीं रुके. उन्होंने आगे लिखा कि यह विडंबना है कि एक तरफ सरकार ने बार, रेस्टोरेंट और समुद्री बीच खोल दिए हैं, वहीं दूसरी ओर देवी-देवता लॉकडाउन में रहने को अभिशप्त हैं. राज्यपाल ने सीएम से अपील की कि सभी जरूरी सावधानियां बरतते हुए सभी पूजास्थलों को खोल दिया जाए.

उद्धव का भी सख्त जवाब

राज्यपाल के इस तरह के पत्र से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का तिलमिलाना स्वाभाविक था. उन्होंने कहा कि जिस तरह से एकदम से लॉकडाउन लगाना उचित नहीं था, उसी तरह से उसे पूरी तरह समाप्त करना भी ठीक नहीं है. हां, मैं हिंदुत्व का अनुसरण करता हूं और मेरे हिंदुत्व को आपकी पुष्टि या प्रमाण की आवश्यकता नहीं है. मुझे किसी से हिंदुत्व सीखने की भी जरूरत नहीं है. श्रद्धा की भावना कायम रखते हुए जनता के प्राणों की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है. इसके बाद मुख्यमंत्री भी जवाब में तंज कसने में पीछे नहीं रहे. उन्होंने अपने पत्र में कटाक्ष करते हुए कहा कि मुंबई को पीओके कहने वाले लोगों का स्वागत करना हिंदुत्व में नहीं बैठता. मुख्यमंत्री का इशारा अभिनेत्री कंगना रनौत की राजभवन में जाकर राज्यपाल से की गई मुलाकात को लेकर था. उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल से यह भी पूछा कि केवल धर्मस्थल खोलना हिंदुत्व और नहीं खोलने का अर्थ आपके मतानुसार सेक्यूलर है तो आपने राज्यपाल पद की शपथ जिस संविधान के अनुसार ली है, उसका भी महत्वपूर्ण आधार सेक्यूलर है, क्या वह संविधान आपको स्वीकार नहीं है? शिवसेना नेता संजय राऊत ने भी कहा कि शिवसेना ने हिंदुत्व को कभी नकारा नहीं है. हिंदुत्व शिवसेना का प्राण और आत्मा है. जिन्होंने (राज्यपाल) सवाल उठाए हैं, उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को जनता के हित में फैसला लेने का पूरा अधिकार है.

शरद पवार ने पीएम को पत्र लिखकर नाराजगी जताई

महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता व एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने राज्यपाल कोश्यारी द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर नाराजगी जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की भाषा और लहजा उनके कद के अनुरूप होना चाहिए. राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी की भाषा से मैं स्तब्ध हूं. सभी धर्मों को समान न्याय देने वाला धर्मनिरपेक्ष संविधान देश ने स्वीकार किया है, जिसका आदर करना चाहिए. राज्यपाल अपने पद की प्रतिष्ठा गिरा रहे हैं. उनके पद की भाषा पर आप ध्यान दें. पत्र की भाषा व आशय दोनों बातें संवैधानिक पद के अनुरूप होनी चाहिए. कोरोना के कारण धार्मिक स्थल न खोले जाने पर सेक्यूलर कह मुख्यमंत्री की अवहेलना करना सही है क्या? पवार ने इस पत्र को मीडिया में रिलीज किए जाने पर आश्चर्य जताया.

यह कैसा संयोग है

इधर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच धर्मस्थल खोलने को लेकर तीखा पत्र व्यवहार हुआ, वहीं बीजेपी ने मंदिरों के कपाट खोलने को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया तथा ‘मदिरा चालू, मंदिर बंद’ की तख्तियां दिखाईं. इससे सवाल उठता है कि क्या बीजेपी की ओर से राज्यपाल को कोई संकेत था? ऐसे मौके पर कंगना ने भी ट्वीट किया- ‘यह जानकर अच्छा लगा कि माननीय गवर्नर महोदय ने गुंडा सरकार से पूछताछ की है. गुंडों ने बार और रेस्त्रां खोले हैं लेकिन मंदिरों को बंद रखा है.’ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि देश की 130 करोड़ जनता में से 100 करोड़ लोगों को अपने प्रार्थनास्थलों में जाना है. आप रोकने वाले कौन हैं?