आखिर हुआ बहुप्रतीक्षित फैसला महाराष्ट्र में खुलेंगे स्कूल, मंदिर

    कोरोना संक्रमण की दहशत के चलते सरकार की हिचक स्वाभाविक थी. इसीलिए लॉकडाउन में शर्तों के साथ धीरे-धीरे शिथिलता दी गई. इस दौरान कोरोना महामारी के मामले घटते चले गए फिर भी कोरोना की तीसरी लहर और नए वैरिएंट की आशंका जताई जा रही थी. केरल में कोरोना संक्रमण के केसेस बढ़ने से चिंता भी हुई क्योंकि इस दक्षिणी राज्य के लोग नौकरी के लिए देश के किसी भी कोने में तथा खाड़ी देशों में जाने को हमेशा तैयार रहते हैं. भय यह भी था कि कोई केरल का संक्रमित व्यक्ति कहीं अपनी मोबिलिटी के चलते कोरोना और न फैला दे. 

    इस दौरान बाजार, होटल-रेस्टोरेंट खोल दिए गए. मास्क लगाने और सुरक्षित दूरी रखने का निर्देश कायम रहा लेकिन फिर भी कुछ लोग इस बारे में गंभीर नहीं थे. बाजार की भीड़ ने सुरक्षित दूरी के निर्देश की धज्जियां उड़ा दी. बार-बार यह मुद्दा उठाया जा रहा था कि जब मदिरालय खोले जा सकते हैं तो मंदिर क्यों नहीं? यह तर्क बिल्कुल सही था. मंदिरों में लोगों को आत्मिक शांति मिलती है. राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों को छोड़कर बाकी ऐसे मंदिर खोले जा सकते थे जहां भीड़ नहीं होती. शिरडी साईं संस्थान, मुंबई के सिद्धी विनायक, कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर, नाशिक का त्र्यंबकेश्वर मंदिर को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की वजह से बंद रखना समझ में आता था. मंदिर सिर्फ भक्तों के लिए ही महत्व नहीं रखते बल्कि उनके पास लगी फूल-हार, पूजा सामग्री व प्रसाद की दूकानें कितने ही लोगों को रोजगार देती हैं. निराश्रित भिखारियों को भी वहीं जीवन यापन के लिए पैसे मिल जाते हैं. पंडे-पुजारी की जीविका भी मंदिर के भरोसे चलती है.

    जनभावना के अनुकूल

    अब राज्य सरकार ने 4 अक्टूबर से स्कूल और 7 अक्टूबर से मंदिरों को खोलने का फैसला किया है जो जनभावना के अनुकूल है. स्कूलों के बारे में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया जाएगा. इसमें शिक्षकों का टीकाकरण, स्कूलों की सफाई, कक्षा में छात्रों के बीच सामाजिक दूरी, मास्क पहनना अनिवार्य रहेगा. जिलाधिकारियों को स्कूल शुरू करने के सभी अधिकार दिए गए हैं लेकिन फिर भी बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों की सहमति आवश्यक होगी. स्कूलों में खेलकूद जैसी गतिविधियां बंद रहेंगी जिसमें परस्पर स्पर्श होता है. स्कूली शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि जिन छात्रों के माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते, उन्हें मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.

    पढ़ाई में सुधार होगा

    ऑनलाइन पढ़ाई एक विवशता रही है. इसमें बच्चे पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाते. टेस्ट होने पर कुछ तो गूगल या नेट से उत्तर खोजते और वही दोहरा देते हैं. क्लासरूम पढ़ाई में जो गंभीरता रहती है, वह ऑनलाइन शिक्षा में नहीं आ पाती. बच्चों का जीवन भी अनियमित हो गया है व दिनचर्या बिगड़ गई है. स्कूल खुलेंगे तो उन्हें सुबह जल्दी उठकर तैयार होना होगा. फिर यूनिफार्म पहनने, टिफिन लेकर बस या वैन से स्कूल जाने से लगेगा कि अनिश्चितता के लंबे दौर के बाद गाड़ी फिर पटरी पर आ गई है. जिन बच्चों के पास मोबाइल, लैपटाप या नेट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, उन्हें स्कूल खुलने से लाभ होगा.