हमेशा याद रखे जाएंगे प्रणब मुखर्जी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन से भारत के राजनीतिक आकाश के एक जाज्वल्यमान नक्षत्र का लोप हो गया जिन्हें दीर्घकाल तक याद रखा जाएगा. वे एक समय अपनी वरिष्ठता की वजह से प्रधानमंत्री बनने के प्रबल हकदार थे परंतु तब यह अवसर उन्हें नहीं मिल पाया. वे अपनी योग्यता व क्षमता से देश के 13वें राष्ट्रपति बने. वे प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी थे. गत वर्ष गणतंत्र दिवस पर उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था. प्रणब मुखर्जी वकील, प्रोफेसर और पत्रकार रहे. वे राजनीति में 5 दशक तक सक्रिय रहे और 5 बार राज्यसभा सदस्य चुने गए. वित्तमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल उल्लेखनीय रहा. जब प्रणब मुखर्जी वित्तमंत्री थे तब डा. मनमोहन सिंह रिजर्व बैंक के गवर्नर थे.

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वरिष्ठतम मंत्री होने के बावजूद उन्हें पीएम पद नहीं मिल पाया और राजीव गांधी को इस पद की शपथ दिला दी गई. प्रणब मुखर्जी ने रक्षा, वित्त, विदेश, वाणिज्य-उद्योग जैसे विभिन्न मंत्रालय संभाले. वे लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता रहे. नरसिंह राव सरकार के दौरान वे 1991 से 1996 तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे. 1997 में उन्हें उत्कृष्ट सांसद चुना गया. वे राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति के अध्यक्ष रहे. पेटेंट संशोधन बिल पर समझौता कराना उनकी विशिष्ट उपलब्धि थी. वे आईएमएफ, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक के प्रशासक बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे. राष्ट्रपति के रूप में 2012 से 2017 तक उनका कार्यकाल गौरवपूर्ण रहा. वे विपक्ष के प्रत्याशी पीए संगमा को हराकर चुने गए थे.

वे सोनिया गांधी के प्रमुख परामर्शदाताओं में से एक थे और कठिन परिस्थितियों में उनका मार्गदर्शन किया. राष्ट्रपति पद से निवृत्त होने के बाद प्रणब मुखर्जी आरएसएस के कार्यक्रम में नागपुर आए थे तब सभी को गहरा आश्चर्य हुआ था लेकिन उस समारोह में उनका भाषण इतना प्रबोधनकारी और व्यापक परिप्रेक्ष्य में रहा कि संघ नेताओं ही नहीं, समूचे देशवासियों ने उसकी सराहना की. वे अध्ययनशील व विद्वान नेता थे. वे बेजोड़ स्मरणशक्ति तथा मजबूत इच्छाशक्ति वाले स्पष्टवादी नेता थे. उन्होंने एक समय माकपा नेता ज्योति बसु को मनाकर मध्यस्थता के नए बिंदु तय किए थे. ममता बनर्जी जब रूठ जाती थीं तो उन्हें मनाने में प्रणब मुखर्जी ही सफल हो पाते थे.