GST पर कांग्रेस की फजीहत बेमेल गठबंधन का खामियाजा

महाराष्ट्र सरकार ने जीएसटी (GST) मुआवजे को लेकर केंद्र सरकार द्वारा सुझाया गया पहला विकल्प (आप्शन वन) स्वीकार कर लिया है. देश के अन्य 20 राज्यों के समान ही महाराष्ट्र भी रिजर्व बैंक (Reserve bank of India) के माध्यम से बाजार से कर्ज लेगा. केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इन राज्यों को इस संबंध में औपचारिक मंजूरी दे दी है. राज्य सरकार का यह कदम कांग्रेस की नीति व रवैये के सर्वथा विपरीत है. कांग्रेस(Congress) अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia gandhi) ने जीएसटी मुआवजे के मुद्दे को लेकर विरोधी दलों की एकता कायम करने के उद्देश्य से वीडियो कांफ्रेसिंग की थी जिसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी शामिल थे. इस कांफ्रेंसिंग में जीएसटी कंपनसेशन पर केंद्र के रवैये का विरोध किया गया था परंतु अब महाराष्ट्र ने इस निर्णय को दरकिनार कर केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.

इस तरह महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार में शामिल कांग्रेस की फजीहत हुई. क्या कांग्रेस इसे बर्दाश्त कर लेगी? ऐसा करने के अलावा उसके पास कोई चारा भी तो नहीं है. महाराष्ट्र सरकार का नेतृत्व शिवसेना कर रही है और एनसीपी के शरद पवार उसके मार्गदर्शक की भूमिका में हैं. सरकार में कांग्रेस तीसरे नंबर पर सबसे जूनियर पार्टनर है. सरकार में बने रहना है तो कड़वा घूंट पीकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निर्णयों को स्वीकार करना ही होगा. महाराष्ट्र में कांग्रेस की स्थिति उन राज्यों से बिल्कुल भिन्न है जहां उसकी खुद के बलबूते पर सरकार है. राजस्थान या छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जिस प्रकार फैसले कर सकती है, वैसा महाराष्ट्र में कदापि नहीं कर सकती. सत्ता सुख भोगने के लिए वह बेमेल गठबंधन में शामिल है लेकिन जब अधिकार नहीं है और निर्णय लागू करने की क्षमता नहीं है तो ऐसी सरकार में रहकर कांग्रेस को क्या मिल रहा है? कांग्रेस और शिवसेना के सिद्धांतों, विचारों, कार्यक्रमों व नीतियों में कहीं कोई तालमेल नहीं है.

सिर्फ बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के उद्देश्य से कांग्रेस व एनसीपी जैसी पार्टियां शिवसेना के साथ गठबंधन सरकार में शामिल हैं. शिवसेना को अपने हिंदुत्व पर अभिमान है जबकि कांग्रेस व एनसीपी दोनों स्वयं को सेक्यूलर बताती हैं. जहां तक जीएसटी क्षतिपूर्ति का मुद्दा है, केंद्र सरकार ने अपनी आर्थिक हालत का हवाला देते हुए राज्यों से कहा कि वे बाजार से स्वयं पैसा हासिल करें क्योंकि कोरोना महामारी की वजह से जीएसटी संग्रह कम हुआ है. कांग्रेस का यह दावा भी हवाई निकला कि ओडिशा की बीजद सरकार भी जीएसटी मुआवजा मामले में उसके साथ है. जिन 20 राज्यों ने केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार किया, उनमें ओडिशा भी शामिल है. इस तरह कांग्रेस की जीएसटी मुद्दे पर हर तरफ से फजीहत हो गई. वह विपक्षी पार्टियों की सरकारों को अपने साथ एकजुट नहीं कर पाई.