यहीं पी लो गन्ने का रस भूलकर भी मत जाना हाथरस

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, कोरोना के कारण जीवन में कोई रस ही नहीं रहा. बिना रसानुभूति के जीवन किस काम का! इसलिए हम सोचते हैं कि सीधे हाथरस चले जाएं.’’ हमने कहा, ‘‘आप हाथरस की बजाय बनारस चले जाइए. गंगा में डुबकी लगाइए और बाबा विश्वनाथ के दर्शन कीजिए. हाथरस में क्या रखा है!’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, आप हमें हाथरस जाने से क्यों मना कर रहे हैं? आपको मालूम होना चाहिए कि काका हाथरसी और निर्भय हाथरसी जैसे कवि हाथरस के ही थे. काका की हास्यरस की कविताएं आपने सुनी होंगी. हमारा उसूल है कि इस हाथ ले, उस हाथ दे, इसलिए हम यहां हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठेंगे, सीधे हाथरस के लिए निकल पड़ेंगे. ट्रेन नहीं तो टैक्सी ही सही, किसी तरह हाथरस पहुंच कर ही दम लेंगे.’’ हमने कहा, ‘‘आप बहुत जिद्दी आदमी हैं.

इतना हठ किस काम का! जाने वाला आदमी चुपचाप चला जाता है. इस तरह गांव भर में ढिंढोरा नहीं पीटता. आप हाथरस की बजाय हरिद्वार भी तो जा सकते हैं. वहां ‘हर की पौड़ी’ पर शाम को होने वाली गंगा आरती देखकर आपका मन प्रसन्न हो जाएगा. अपने गंतव्य के बारे में पुनर्विचार कीजिए.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में हाथरस ही है. सोचते हैं कि जाकर देखें हाथरस कैसा है!’’ हमने कहा, ‘‘वहां जाना मुसीबत को दावत देना है. वहां सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ है जिसकी सीबीआई जांच जारी है. वहां जबलपुर मेडिकल कालेज की एक डाक्टर राजकुमारी बंसल नकली भाभी बनकर गई थी और पीड़िता की फर्जी रिश्तेदार बनकर रह रही थी. जब पुलिस ने परिवारजनों की जांच-पड़ताल शुरू की तो वह नकली भाभी भाग निकली. पुलिस और एसआईटी को हाथरस केस में विदेशी फंडिंग के सिलसिले में पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और भीम आर्मी के लिंक भी मिले हैं.

इतना ही नहीं, मध्यप्रदेश के मंडला से गरीब परिवारों की 13 लड़कियां सिलाई सिखाने के नाम पर हाथरस ले जाई गईं. यह मानव तस्करी या ह्यूमन ट्रैफिकिंग का मामला है. जिस शहर में इतना गड़बड़ घोटाला है, वहां से दूर रहना ही अच्छा! वहां जाएंगे तो पुलिस आपसे भी पूछताछ करने लग जाएगी. सीबीआई खोज रही है कि हाथरस प्रकरण में किसका हाथ है.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘अच्छा हुआ निशानेबाज, जो आपने हमें सतर्क कर दिया. हाथरस जाने का प्रोग्राम कैंसिल! हम यहीं एपल जूस, आरेंज जूस या गन्ने का रस पिएंगे लेकिन हाथरस नहीं जाएंगे.’’