शेखचिल्ली हैं पड़ोसी देश नेपाल के बाद अब पाक का विवादित नक्शा

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, लगता है नेपाल और पाकिस्तान के नेताओं को पागल कुत्ते ने काट लिया है. वे विक्षिप्त जैसी हरकत कर रहे हैं. उनकी अक्ल शायद घुटने से भी नीचे चली गई है. पहले तो नेपाल ने लिपुलेख, कालापानी और लिपियाधुरा जैसे भारतीय क्षेत्रों को अपने नक्शे में दिखाया और अपनी संसद में यह फर्जी नक्शा पास भी करा लिया. जिस तरह खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है, उसी तरह पाकिस्तान ने भी शेखचिल्ली की मिसाल पेश करते हुए विवादित नक्शा बनाया और भारत के कई क्षेत्रों पर अपना दावा ठोक दिया.’’ हमने कहा, ‘‘जब मौत करीब आती है तो चीटीं के पर निकल आते हैं. इन पड़ोसी देशों का हाल कुछ ऐसा है जैसे बौना उछल-उछल कर आसमान को छूने की कोशिश करने लगे! 1947 में भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हो गया था. इसके बाद उसने कश्मीर का एक-तिहाई हिस्सा हड़प लिया जो कि पीओके कहलाता है. कभी न कभी भारत उसे मुक्त कराके रहेगा. इन देशों को भारत से टकराना बहुत महंगा पड़ेगा. शायद उन्होंने यह कहावत नहीं सुनी होगी- सौ सुनार की तो एक लोहार की!’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, पाकिस्तान की गुस्ताखी देखिए, अमेरिका के फेंके टुकड़े पर 60 साल से भी ज्यादा समय तक पलने के बाद अब वह चीन की गोद में जाकर बैठ गया है. पाकिस्तान की इकनॉमी खस्ता है. वह अपने लोगों का पेट नहीं पाल सकता. उसका एकमात्र उद्योग आतंकवाद की फैक्टरी चलाना और भारत को गीदड़भभकी देना है. इस पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने विवादित नक्शे को मंजूरी दे दी है. पहले वह सिर्फ पीओके को अपना हिस्सा बताता था लेकिन अब नए नक्शे में पूरे कश्मीर को शामिल किया है. इस बेतुके नक्शे में लद्दाख, सियाचिन समेत गुजरात के जूनागढ़ पर भी दावा ठोका गया है. पाकिस्तान के पीएम ने इसे अपने मुल्क के इतिहास में सबसे ऐतिहासिक दिन बताया है.’’ हमने कहा, ‘‘ऐसे हवाई किले बनाने से कुछ नहीं होता. पाकिस्तान से एक बार टूटकर बांग्लादेश बन गया, अब बलूचिस्तान भी उससे अलग होने की फिराक में है. ऐसा हुआ तो सिंध भी पाकिस्तान से जुदा हो जाएगा. नेपाल और पाकिस्तान विस्तारवादी चीन से यही कुटिलता सीख रहे हैं कि दूसरे की जमीन को अपना बताना. कागज पर आड़ी-तिरछी लकीरें खींचने से नक्शे नहीं बनते. इन फर्जी नक्शे बनाने वालों को समझ लेना चाहिए कि जो भारत से टकराएगा, मिट्टी में मिल जाएगा.’’