गिफ्ट पर 25,000 की लिमिट, वसूली के टारगेट पर कोई सीमा नहीं

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, किसी की प्रेम से दी गई भेंट स्वीकार करने से इनकार नहीं करना चाहिए. उपहार को प्यार से लो और बदले में धन्यवाद, शुक्रिया या थैंक्यू कुछ भी बोल कर आभार मानो. जिंदगी में भेंटवस्तु, गिफ्ट या उपहार का आदान-प्रदान चला ही करता है. आपसी मेल-मिलाप के लिए यह जरूरी है.’’ 

    हमने कहा, ‘‘आपको मालूम होना चाहिए कि केंद्र सरकार ने 50 वर्ष पुराने नियम में संशोधन करते हुए आईएएस, आईपीएस तथा इंडियन फॉरेन ओवरसीज सर्विस अधिकारियों को 25,000 रुपए कीमत तक के गिफ्ट लेकर अपने पास रखने की अनुमति दी है. इसके पहले 1968 में बना यह नियम बहुत कड़ा था. इसके मुताबिक, इन अधिकारियों के लिए बंदिश थी कि वे सरकार की मंजूरी के बिना 5,000 रुपए से अधिक मूल्य का उपहार स्वीकार नहीं कर सकते. यह भी कहा गया था कि इन अधिकारियों को औद्योगिक अथवा वाणिज्यिक कंपनियों या अन्य संगठनों से महंगा आतिथ्य या बार-बार आतिथ्य स्वीकार करने से बचना चाहिए.’’ 

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, यह नियम इसलिए है ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके. कितनी ही कंपनियां या कारपोरेट बड़े सरकारी अधिकारियों को समय-समय पर गिफ्ट भिजवाती हैं. आजकल 5,000 रुपए में कोई दम नहीं रह गया है इसलिए उपहार की मूल्य सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपए कर दी गई. इतने पर भी यह बहुत कम है क्योंकि सन 1968 से लेकर अब तक के 53 वर्षों में रुपए की कीमत बहुत घट चुकी है.’’ 

    हमने कहा, ‘‘असली मूल्य भावना का है. भगवान ने कहा है- पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति । तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः॥ ( जो कोई भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्धबुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुणरूप से प्रकट होकर प्रीतिसहित स्वीकार करता हूं.) शबरी ने राम को बेर खिलाए थे और सुदामा के चावल कृष्ण ने खाए थे.’’ 

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, यहां बात भगवान की नहीं, ब्यूरोक्रेट की हो रही है. वे महंगे गिफ्ट लेकर किसी के एहसानमंद न हो जाएं, इसलिए यह नियम बनाया गया है. वैसे छोटे-मोटे गिफ्ट से किसी को तसल्ली नहीं होती. सत्ताधीश अपने मातहत अधिकारियों को करोड़ों की वसूली का टारगेट देते हैं. इस टारगेट की लिमिट को लेकर कोई कानून आज तक नहीं बन पाया है.’’