चर्चा में आया सूरत, किसी तरह बिगड़ी बात बनाने की जरूरत

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज हमें वर्तमान राजनीतिक स्थिति या सियासत के सूरत-ए-हाल के बारे में बताइए? क्या वर्तमान संकट का हल किसी सूरत में निकल सकता है?’’ हमने कहा, आप बार-बार सूरत शब्द का उल्लेख क्यों कर रहे हैं. देखना ही है तो किसी खूबसूरत बला को देखिए और गाइए- लड़की ब्यूटिफुल कर गई चुल! 

    सूरत का ख्याल रखते हुए एक फोटो स्टुडियो की लाइन रही है- इफ यू आर नॉट ब्यूटिफुल वीविल मेक यू ब्यूटिफुल, इफ यू आर ब्यूटिफुल, वी शैल कैप्चर योर ब्यूटी. यदि आप खूबसूरत नहीं हैं तो हम आपको खूबसूरत बना देंगे और (यदि आप पहले से ही खूबसूरत हैं तो आपकी खूबसूरती हम अपने कैमरे में कैद कर लेंगे­.)

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, हमारा आशय इस बात से है कि गुजरात के गांधीनगर, अहमदाबाद, बडोदरा, भुज, अमरेली आदि स्थानों को पीछे छोड़कर सूरत शहर अचानक चर्चा में आ गया है. महाराष्ट्र के बागी विधायक शिवसेना के वरिष्ठ नेता सूरत ले जाए गए. कहते हैं, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे ने शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे को मनाने के लिए अपने 2 विश्वस्त दूतों को सूरत भेजा.’’ 

    हमने कह, ‘‘सूरत अवश्य जाना चाहिए. वह सूती कपड़े का व्यापार केंद्र है. वहां हीरे भी तराशे जाते हैं.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, राजनीति के व्यापार में भी चुन-चुनकर हीरे तराशने का काम इस समय जारी है. नगीने कहां नहीं मिलते! आपने गुदड़ी के लाल वाली कहावत सुनी होगी. यदि एकनाथ अपने साथ विधायकों को ले गए हैं तो सत्संग कर  रहे होंगे. महाराष्ट्र के संतों में ज्ञानदेव, तुकाराम व एकनाथ के नाम विख्यात हैं.’’ 

    पड़ोसी ने कहा, निशानेबाज, हमारी बात को जरा सीरियसली लीजिए. महाराष्ट्र की राजनीति में बगावत के शोले धधक रहे हैं. उद्धव ठाकरे सोच में डूबे हैं कि ये क्या हुआ, क्यों हुआ, कब हुआ कैसे हुआ ये ना पूछो!’’ हमने कहा, ‘‘आघाड़ी की बगिया के बागवान शरद पवार के रहते चिंता की बात नहीं है. जो होगा, अच्छा ही होगा.’’