मुंबई में भी बनाएं भगोड़े बिजनेस मैन व गैंगस्टर का म्यूजियम

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज (Nishanebaaz), याद कीजिए फूलन, मोहर, माधो, की दास्तान, चंबल की नई पहचान जहां डाकुओं के म्यूजियम (Bandits Museum) भी होगी शान!’’ हमने कहा, ‘‘आप अनोखी बात कह रहे हैं. हमें लंदन म्यूजियम मुंबई के प्रिंस आफ वेल्स म्यूजियम (Prince Of Wales Museum Mumbai) के बारे में पता है. वाशिंगटन में गोडार्ड स्पेस म्यूजियम है. वहां म्यूजियम आफ अफ्रीकन-एशियन स्टडीज भी है. रूस के लेनिनग्राड या सेंट पीटर्सबर्ग में अनेक म्यूजियम हैं. दिल्ली में महात्मा गांधी से जुड़ी वस्तुओं का और तीन मूर्ति भवन में नेहरू म्यूजियम है. पेरिस भी अपने म्यूजियम के लिए विख्यात है.’’

पड़ोसी ने कहा, निशानेबाज विश्व में कहीं भी डकैती से संबंधित म्यूजिम नहीं होगा. इस प्रकार का पहला म्यूजियम कुख्यात डाकू मोहर सिंह के कर्म क्षेत्र मेहगांव में भिड़ पुलिस बनाने जा रही है. इसके लिए ब्रिटिश काल के पुराने थाने की बिल्डिंग का चयन किया गया है. इस थाना भवन को हेरिटेज लुक में सजाया-संवारा जाएगा. इस थाने में चंबल में सक्रिय रहे डाकुओं की पूरी हिस्ट्रीशीट, फोटो, गिरोह के सदस्यों की जानकारी व उनके अंत की पूरी कहानी बताई जाएगी. आपको बता दें कि चंबल घाटी से पहले डाकू सरदार मानसिंह का भारी दबदबा था. फिर रूपा, मानसिंह तोमर के काम की दहशत थी. इसके बाद फूलनदेवी धसा बाबा, मोहर सिंह, माधो सिंह जैसे प्रमुख डकैत हुए. मानसिंह के बेटे तहसीलदर सिंह बाद में विनोबा भावे के मार्गदर्शन में सर्वोदयी कार्यकर्ता बन गए. मोहरसिंह व माधोसिंह ने अपने गिरोह के साथ लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सामने आत्म समर्पण किया था. इन्हें मुंगावली खुली जेल में रखा गया.

रिहा होने के बाद ये डाकू सुधर कर समाज की मुख्यधारा में लौटे.’’ हमने कहा, ‘‘जब मध्यप्रदेश में डाकुओं का म्यूजियम बसाने की पहल हो रही है तो महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में भी भगोड़े बिजनेस मैन, शेयर घोटालेबाज हर्षद मेहता, गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम, हाजी मस्तान जैसे तस्कर का भव्य म्यूजियम बनाया जा सकता है. यह म्यूजियम भी लंदन के मैडम टुसाड के वैक्स म्यूजियम जैसा होना चाहिए. इसमें इन सारे लोगों के मोम के सजीव दिखने वाले पुतले लगाए जाएं और इनके काले कारनामों का जिक्र हो. इनमें विजय माल्या, मेहुल चोकसी, नीरव मोदी, ललित मोदी, जैसे भगोड़ों के पुतले भी लग सकते हैं.’’ पड़ोसी ने कहा, निशानेबाज, आइडिया अच्छा है. इस पर काम हो सकता है.’’