शीत सत्र से सस्पेंस हटा, नागपुर का नाम कटा, मुंबई में दिखेगी छटा

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, पहले ही अनुमान था कि महाराष्ट्र विधान मंडल का शीत सत्र इस बार नागपुर में होने की संभावना नहीं है. न तो इमारतों का रंग-रोगन हो रहा था, न बंगलों की साफ सफाई! मुंबई से स्टाफ या फाइलें भेजने को लेकर भी कोई हलचल नहीं थी. आखिर तय हो गया कि मुंबई में ही शीत सत्र होगा. पिछले वर्ष शीत सत्र कोरोना की बलि चढ़ गया था. इसके पहले नागपुर करार के अनुसार शीत सत्र नागपुर में होता आया है.’’ 

    हमने कहा, ‘‘समय और परिस्थिति को देखते हुए परंपराएं बदली भी तो जा सकती हैं. कोई लकीर का फकीर बनकर क्यों रहे! मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की रीढ़ का आपरेशन हुआ है, इसलिए उनके नागपुर आने का सवाल ही नहीं था. विधान परिषद चुनाव भी सामने है, इसलिए दिसंबर तक किसी के पास टाइम नहीं है. सभी का ध्यान वहीं लगा है इसलिए 7 दिसंबर से नागपुर में सत्र के लिए किसी का मूड ही नहीं था. 

    अब नागपुर में ठंड की शुरुआत हुई है. मुंबई वालों को नागपुर की ठंड सहन नहीं होती. वे हर सप्ताहांत में यहां से भाग जाया करते थे. ठाकरे सरकार को नागपुर में सत्र लेने में कोई रुचि नहीं है. विपक्ष ने भी इसके लिए जोर नहीं दिया कि सत्र संतरानगरी में ही होना चाहिए. विधायक यहां आते तो अपने साथ संतरे का पिटारा या संतरा बर्फी लेकर जाते.’’ 

    हमने कहा, ‘‘इस बात पर भी गौर कीजिए कि सत्र 22 से 28 दिसंबर तक मुंबई में होगा. इसके बाद नेतागण हैपी न्यू ईयर का जश्न मनाने में लग जाएंगे. मुंबई वाली रंगीनियां नागपुर में कहां! इसलिए वहां बैठे नेता मुंबई छोड़ना ही नहीं चाहते. सरकार के सामने सिर्फ पश्चिम महाराष्ट्र और मुंबई का संदर्भ है, इसलिए काहे का नागपुर और कैसा विदर्भ!’’