तमिलनाडु के कुंआरे ब्राम्हण, खोज रहे अपने लिए यूपी-बिहार में दुल्हन

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज हमने सुना है कि पति-पत्नी का 7 जन्मों तक साथ रहता है और जोड़े आसमान से बनकर आते हैं. अंग्रेजी में कहा गया है- मैंरिजेस आर मेड इन हैवन, सेलीब्रेटेड आन अर्थ. इस पर आपकी क्या राय है?’’ 

    हमने कहा, ‘‘यदि ऐसी बात होती तो तमिलनाडु के 40,000 से ज्यादा युवा तमिल ब्राम्हण शादी के लिए नहीं तरसते. तमिलनाडु में विवाद योग्य आयुवर्ग के यदि 10 ब्राम्हण लड़के हें तो इसके मुकाबले लड़कियां केवल 6 हैं. इसलिए 30 से 40 वर्ष तक आयु के तमिल ब्राम्हण युवा तमिलनाडु में दुल्हन नहीं ढूंढ पा रहे हैं. समस्या गंभीर है और युवा अधीर हैं.’’ 

    पड़ोसी ने कहा ‘‘तमिलनाडु ब्राम्हण संघ इस मसले का समाधान खोज रहा है उसने ब्राम्हण दुल्हनों की खोज में यूपी और बिहार में विशेष अभियान शुरु किया है. इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली, लखनऊ और पटना में समन्वयक नियुक्त किए गए हैं.’’ हमने कहा, इसमें भाषा और संस्कृति और खानपान की समस्या आ सकती है. उत्तरप्रदेश व बिहार की दुल्हन तमिलनाडु में कैसे गुजारा करेगी. वहां की भाषा और संस्कृति में कैसे रम पाएगी? यूपी में अवधी और बिहार में भोजपुरी और मैथिली लोकभाषा बोली जाती है. तमिलनाडु में हिंदी प्रदेश की दुल्हन क्या करेगी?’’ 

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, आपने कलमहासन और रति अग्निहोत्री की फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ देखी होगी. जिसका गीत था तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन अनजाना! इससे तमिल युवक और हिंदी प्रदेश की युवती का प्रेम दिखाया गया है. इसके अलावा ‘टू स्टेट’ फिल्म में पंजाबी हीरो और तमिल हीरोइन का प्रेम दर्शाया गया.’’ हमने कहा, फिल्मों और असली जिंदगी में काफी फर्क होता है.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं. इतना मानकर चलिए कि मियां-बीबी राजी तो क्या करेगा काजी!’’