अजब कुर्सी की गजब कहानी गडकरी की जुबानी सपनों की कुरबानी

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी स्पष्टवादी हैं. वे विपक्ष के साथ ही अपनी पार्टी को घेरने से भी नहीं चूकते. बड़े मजेदार और आत्मीयतापूर्ण लहजे में वे अपनी बात रखते हैं. यह एक तरह की मीठी चुटकी है. उन्होंने बीजेपी सहित सभी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के भीतर और बाहर सब जगह सभी पार्टियों में समस्याएं हैं तथा हर कोई दुखी है. विधायक इसलिए दुखी हैं कि वह मंत्री नहीं बन पा रहे हैं और मंत्री इसलिए दुखी हैं कि मंत्री तो बन गए लेकिन अच्छा विभाग नहीं मिला और जिन मंत्रियों को अच्छा विभाग मिल गया वे इसलिए दुखी हैं कि वे मुख्यमंत्री कब बनेंगे. मुख्यमंत्री इस बात को लेकर दुखी है कि पता नहीं वह कब तक कुर्सी पर रहेंगे?’’

    हमने कहा, ‘‘यह बात बिलकुल सही है कि महत्वाकांक्षी व्यक्ति अपनी वर्तमान स्थिति से संतुष्ट नहीं होने से वह दुखी होता है. दुख से क्रोध आता है और क्रोध से मतिभ्रम पैदा होता है. भगवान बुद्ध ने भी कहा था कि इच्छा दुखों का मूल है लेकिन कोई भी व्यक्ति व्यक्ति इच्छा किए बिना रह नहीं सकता. बच्चों से बूढ़े तक हर कोई इच्छाओं के घेरे में जीता है. गडकरी ने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए मुझे ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला जो दुखी न हो. स्वयं के बारे में उन्होंने कहा कि मैं भविष्य की चिंता नहीं करता हूं बल्कि वर्तमान में खुश रहता हूं.’’

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘गडकरी का कथन बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर लागू होता है. गुजरात में बीजेपी के कई दावेदार देखते रह गए और भूपेंद्र पटेल नए सीएम बना दिए गए. राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार व राजनीतिक नियुक्तियां गहलोत और पायलट गुट की खींचतान के बीच अटकी हुई हैं’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, गडकरी बिल्कुल सही कह रहे हैं. पूरे विश्व को दुखमय बताते हुए गुरुनानक ने भी कहा था नानक दुखियां सब संसार! भविष्य के काल्पनिक सुख की लालसा में लोग अपना वर्तमान खराब कर लेते हैं.’’