राम मंदिर निर्माण के बहाने हिंदुओं को जोड़ने की योजना

अयोध्या में राम मंदिर (Ram temple) निर्माण के बहाने विश्व हिंदू परिषद (Vishwa hindu parishad) देश भर के हिंदुओं को जोड़ने की विराट योजना पर काम कर रही है. प्रयोजन यही है कि लोग मन और भावना से इस उपक्रम में स्वयं को सहभागी मानें. इसके लिए 15 जनवरी से 27 फरवरी 2021 तक देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा और भारत के 4 लाख गांवों के 11 करोड़ परिवारों से संपर्क कर प्रति व्यक्ति न्यूनतम 10 रुपया और प्रत्येक परिवार 100 रुपया सहयोग राशि ली जाएगी. इस अभियान को सुचारु रूप से संचालित करने की योजना बन चुकी है और कार्यकर्ताओं की वेलिया बनाई जा रही है.

10 या 100 रुपए की राशि भले ही सामन्य हो लेकिन जनता को लगेगा कि वह जन्म भूमि पर राम मंदिर निर्माण के पावन कार्य से जुड़ी है तथा फूल नहीं तो फूल की पंखुड़ी जैसा योगदान दे रही है. विहिप का मूल उद्देश्य बिखरे हुए हिंदुओं को संगठनिक रूप से अपने करीब लाना भी है. अयोध्या में मंदिर निर्माण की योजना भी काफी व्यापक और भव्य है. इसमें संग्रहालय, ग्रंथलय, रंगभूमि, महाशाला, सम्मेलन केंद्र, सत्संग भवन, धर्मशाला, अभिलेखागार, अनुसंधान केंद्र, अतिथि भवन, प्रशासनिक भवन आवासीय परिसर, प्रदर्शनीय तीर्थ यात्री सुविधा का समावेश है. संगीत फव्वारा व पार्किंग भी रहेंगे. इसके पहले भी विहिप तथा संघ परिवार से जुड़े संगठन हिंदुओं को एकत्र करने के विविध उपक्रम करते रहे हैं. यहां 70 के दशक में एकनाथ रानडे द्वारा कन्याकुमारी में विवेकानंद शिला स्मारक के निर्माण के लिए की गई पहल का उल्लेख किया जा सकता है. यह एक दुष्कर कार्य था जिसके लिए रानडे ने तमिलनाडु के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्य्मंत्री एम  भक्त वत्सलम से निरंतर आग्रह कर प्रोजेक्ट की अनुमति मांगी.

फिर योजना का स्वरूप व भव्यता के बारे में बताकर और अधिक जगह स्वीकृत करवाया. अफसरशाही को भी राजी किया. समुद्र की भीषण लहरों के बीच उस शिला के आसपास निर्माण कार्य इंजीनियरों के लिए चुनौतीपुर्ण था, जहां स्वामी विवेकानंद ने साधाना की थी. आखिर इस कार्य को सफलता मिली और दर्शनीय स्मारक का निर्माण हुआ. इसके लिए भी तब युवाओं और छात्रों से सिर्फ 1-1 रुपया जुटाया गया था ताकि वे इस उपक्रम से स्वयं को जुड़ा हुआ मानें. इतना तो मानना होगा कि संघ परिवार या विहिप के कार्यकर्ता जो ठान लेते हैं, उसे पूरा करके मानते हैं.