मोदी की विपक्ष को ललकार, होनी चाहिए डबल इंजन की सरकार

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, हमें अफसोस है कि हमारी कार में सिर्फ एक ही इंजन है. घर के कूलर में और छत पर पानी की टंकी भरने के लिए भी एक छोटी सी मोटर या पम्प से काम चलता है लेकिन प्रधानमंत्री हमेशा डबल इंजन की बात करते हैं. देशवासियों को चाहिए कि जब भी खरीदना हो, एक नहीं बल्कि 2 इंजन खरीदें.’’ हमने कहा, ‘‘आप प्रधानमंत्री मोदी का आशय नहीं समझे. वे संकेत देते हैं कि यदि केंद्र के साथ राज्य में भी बीजेपी की सरकार हो तो डबल इंजन की ताकत आ जाती है. राज्य के विकास में केंद्र से भी पूरा सहयोग मिलता है. इसलिए आधा तीतर, आधा बटेर नहीं होना चाहिए. सेंट्रल और स्टेट अथवा दिल्ली से गली तक बीजेपी ही रहनी चाहिए. इससे एकसूत्रता और आपस में ट्यूनिंग बनी रहती है.’’

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, पीएम जनता को डबल इंजन का फायदा समझाते हैं लेकिन हमारा कहना है कि वे इससे आगे बढ़कर 4 इंजन वाले जेट विमान या रॉकेट के पावरफुल इंजन की बात क्यों नहीं करते! इंजन की बात कोई इंजीनियर करे तो समझ में आता है लेकिन पीएम क्यों हर वक्त डबल इंजन का जिक्र करते हैं? राजनीति में इंजन कहां से आ गया?’’

    हमने कहा, ‘‘1885 में बनी कांग्रेस का इंजन 136 वर्ष पुराना हो गया. इसे आप विंटेज इंजन कह सकते हैं. बीजेपी की स्थापना 1980 में हुई, इसलिए उसका इंजन 41 वर्ष का है. मोदी ने उसे और दमदार बना दिया. वैसे 1984 में यह इंजन फेल हो गया था जब बीजेपी को लोकसभा में सिर्फ 2 सीट मिली थी. समाजवाद की पटरी पर चलने वाला नेहरू युग का इंजन 1991 तक चला. जब नरसिंहराव की सरकार आई तो इंजन को मनमोहन सिंह ने ओवरहाल किया और उसे उदारवादी खुली अर्थव्यवस्था की पटरी पर दौड़ा दिया.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, डबल इंजन वहां लगा करता था जहां ट्रेन को पहाड़ी वाले ऊंचे इलाके में चलाना पड़ता था. शिमला की टॉय ट्रेन मशहूर रही है. अब तो इलेक्ट्रिक इंजन इतने पावरफुल हो गए हैं कि अकेला इंजन 1 किलोमीटर लंबी मालगाड़ी को खींच लेता है. विकास का इंजन ही देश की इकोनॉमी को आगे ले जाएगा.’’