धारा 370, तीन तलाक, राम जन्मभूमि पूजन के बाद अब BJP का अगला एजेंडा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की बीजेपी सरकार 6 वर्षों से लगातार उन मुद्दों को लागू करती रही है जिनका वादा उसने अपने चुनावी एजेंडे में किया था. पार्टी की प्रतिबद्धता इन सारे मुद्दों से जुड़ी थी. अब कोई यह नहीं कह सकता कि ये सारे वादे चुनाव जीतने के लिए किए जाते हैं और बाद में इन्हें भुला दिया जाता है. अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास ऐसा अनूठा, ऐतिहासिक कदम है जो हर भारतवासी की अस्मिता, गहन आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा है. यह भारतीयों की सामाजिक-सांस्कृतिक एकता को भी प्रतिबिंबित करेगा. बीजेपी नेता कहते भी थे कि जब केंद्र और उत्तरप्रदेश दोनों में बीजेपी सरकार आ जाएगी तो मंदिर निर्माण का काम सुगम हो जाएगा. इसके साथ ही नवंबर 2019 में राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का अनुकूल फैसला भी आ गया. पुरातात्विक प्रमाणों ने भी इस बात की पुष्टि कर दी कि उस स्थल पर कभी मंदिर था जिसके अवशेष उत्खनन में पाए गए. बीजेपी ही अकेली राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी थी जो जन्मभूमि स्थल पर राम मंदिर निर्माण का खुले तौर पर समर्थन कर रही थी. वोटबैंक की खातिर जो पार्टियां मंदिर निर्माण का विरोध कर रही थीं, उन्हें जनता ने विगत 2 आम चुनावों में पटखनी देकर सबक सिखा दिया कि वह राष्ट्र धर्म, राष्ट्रीय गौरव और अपनी संस्कृति के साथ कोई खिलवाड़ सहन नहीं कर सकती. 1984 में केवल 2 सीटों पर सीमित रह गई बीजेपी को 1989 में 85 तथा 1999 में 182 लोकसभा सीटें मिलीं. 2014 के आम चुनाव में बीजेपी को 282 सीटें मिलीं और मोदी सरकार सत्ता में आई. 2019 में जनता ने मोदी के कुशल नेतृत्व में आस्था व्यक्त करते हुए बीजेपी को 303 सीटें देकर भारी बहुमत से जिताया. मोदी शासन काल में ऐसे ऐतिहासिक फैसले लागू किए गए जिनकी पिछली सरकार से उम्मीद नहीं की जा सकती थी. सरकार ने तीन तलाक को अवैध करार देने का कानून बनाकर करोड़ों मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिया जिन पर 3 तलाक का खतरा तलवार के समान लटकता रहता था. धारा 370 व 35ए हटाकर जम्मू-कश्मीर की भारत के साथ एकता-अखंडता को पुष्ट किया. ये ऐसी धाराएं थीं जो विशेष राज्य का दर्जा देने के नाम पर जम्मू-कश्मीर को भारत की मुख्यधारा से अलग रखती थीं. अब राम जन्मभूमि पर मंदिर का शिलान्यास भी हो गया. इसके बाद बीजेपी का अगला एजेंडा क्या होगा? एक तो कॉमन सिविल कोड लागू करना और दूसरे पाकिस्तान द्वारा कब्जाए गए पीओके को मुक्त कराना हो सकता है.

कॉमन सिविल कोड ही बाकी रहा

बीजेपी के घोषित एजेंडा में से सिर्फ समान नागरी कानून (कॉमन सिविल कोड) ही बाकी रह गया. विश्व के तमाम देशों में कानून की एकरूपता है जो सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है. एक देश में अलग-अलग समुदायों के लिए भिन्न कानूनी पैमाना क्यों लागू हो? विवाह, संपत्ति, उत्तराधिकार के कानून सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए. ऐसा क्यों हो कि किसी वर्ग पर एक से अधिक विवाह करने पर द्विभार्या प्रतिबंधक कानून लागू हो और दूसरे वर्ग के व्यक्ति को 4 शादी करने की छूट रहे? संपत्ति व उत्तराधिकार में भी बेटे-बेटी को बराबरी का हिस्सा मिलने का कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए. बीजेपी कितने ही दशकों से कॉमन सिविल कोड लागू करने की बात करती रही है. मोदी सरकार का कार्यकाल 2024 तक है और मोदी के प्रभाव, लोकप्रियता व कार्यक्रमों को देखते हुए वह इसके बाद भी सत्ता में आने की उम्मीद कर सकती है. बीजेपी का बहुमत तो है ही, साथ ही एनडीए के घटक दलों को भी जोड़ लिया जाए तो यह सरकार संविधान संशोधन विधेयक लाकर कॉमन सिविल कोड पारित करा सकती है. एनआरसी और सीएए के मुद्दे भी कोरोना संकट टलने के बाद फिर उभर सकते हैं.

अभी अन्य चुनौतियां हैं

मोदी सरकार ने अपने एजेंडे के बड़े काम निपटा लिए लेकिन अभी कोरोना महामारी और चीन का आक्रामक रवैया सबसे प्रमुख चुनौतियां हैं. इसके अलावा आर्थिक मोर्चे पर स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है. अर्थव्यवस्था चरमरा रही है, उद्योग-व्यवसाय ठप हैं, बेरोजगारी बढ़ती ही जा रही है. खाड़ी देशों से लाखों की तादाद में भारतीय लौटने को मजबूर हैं. मोदी सरकार के सामने आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य है. सभी के लिए आवास उपलब्ध कराने तथा किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने का उसका वादा है. कोरोना का टीका विकसित किया जाना है.  महामारी से देशवासियों का बचाव एक बड़ी चुनौती है. इन सारी बातों को देखते हुए अभी बीजेपी और मोदी सरकार कॉमन सिविल कोड को लेकर जल्दबाजी में नहीं रहेगी. स्वरोजगार व स्टार्टअप को बढ़ावा देना उसकी प्राथमिकता है और सरकार की विभिन्न योजनाओं में गरीबों, किसानों, महिलाओं व पिछड़े वर्गों का कल्याण सर्वोपरि रहा है.