ED के नोटिस पर शिवसेना – केंद्र आमने-सामने

इसे वक्त का सितम कहेंगे कि हिंदुत्व की पैरोकार पार्टियां शिवसेना (Shiv Sena) और बीजेपी (BJP) एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहातीं. केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी का अलग मिजाज है तो महाराष्ट्र में शिवसेना के बेहद तीखे तेवर हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) (Enforcement Directorate)(ED),ने शिवसेना नेताओं व उनके परिजनों के खिलाफ जांच शुरू की है. खासतौर पर शिवसेना नेता संजय राऊत की पत्नी (Varsha Raut) को नोटिस भेजे जाने के मुद्दे को लेकर शिवसेना व केंद्र आमने-सामने आ गए हैं.

केंद्रीय जांच एजेंसियां जब किसी विपक्षी पार्टी के नेता या उसके परिजन के खिलाफ सक्रिय होती हैं तो इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया जाता है. पहले भी देखा गया है कि केंद्र की कोई भी सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने या परेशान करने के लिए सीबीआई या ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करती रही है. यह जांच कभी तेज की जाती है तो कभी धीमी. कुछ अवसरों पर जांच ठंडे बस्ते में भी डाल दी जाती है. ऐसा माना जाता है कि केंद्र सरकार के संकेतों पर ही ये एजेंसियां किसी के पीछे लग जाती हैं. यदि इस दौरान कुछ राजनीतिक एडजस्टमेंट हो गया तो इनकी कार्रवाई शिथिल हो जाती है. ऐसे में लोगों को शक होता है कि क्या केंद्रीय जांच एजेंसियां केंद्र सरकार की कठपुतली के समान काम करती हैं?

महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व में सत्तारूढ़ महाविकास आघाड़ी की सरकार को ईडी के जरिए निशाने पर लिया जा रहा है. पिछले दिनों प्रताप सरदेसाई नामक शिवसेना नेता पर ईडी ने कार्रवाई की और अब शिवसेना के वरिष्ठ नेता व सांसद संजय राऊत की पत्नी वर्षा राऊत को प्रवर्तन निदेशालय ने नोटिस भेजा है. ये नोटिस पीएमसी बैंक घोटाले की जांच के मामले में भेजा गया है. कुछ दिनों पहले ईडी ने संजय राऊत के करीबी प्रवीण राऊत की गिरफ्तारी की थी. ईडी जानना चाहती है कि प्रवीण राऊत के अकाउंट से वर्षा राऊत के अकाउंट में ट्रांजैक्शन कैसे हुआ और इसके पीछे क्या कारण है? पूरी जानकारी जुटाने के लिए ही वर्षा राऊत को समन भेजा गया. संजय राऊत ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना जो शपथपत्र दिया था, उसमें भी इस बात का उल्लेख था कि प्रवीण राऊत के अकाउंट से वर्षा राऊत के अकाउंट में कुछ पैसे लोन के रूप में दिए गए हैं.

शिवसेना का कड़ा रुख

संजय राऊत ने कहा कि यह राजनीतिक षडयंत्र है. यह 10 वर्ष पुराना मामला है. उनकी पत्नी शिक्षिका हैं जिन्होंने 50 लाख का कर्ज लिया था. इसका राज्यसभा के हलफनामे में उल्लेख है और इनकम टैक्स रिटर्न में भी बताया गया है. इसमें ईडी और बीजेपी को कौन सी दिक्कत है? वर्षा राऊत को ईडी का नोटिस मिलने पर शिवसेना ने आक्रामक रुख अपनाया और बीजेपी को इसके लिए जिम्मेदार मानते हुए ईडी कार्यालय इमारत के बाहर बीजेपी का प्रदेश कार्यालय वाला बैनर लगा दिया.

उबल पड़े संजय राऊत

शिवसेना सांसद संजय राऊत ने आरोप लगाया कि ईडी बीजेपी का पोपट (तोता) बन गई है और केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है. फिर भी सरकारी संस्था होने की वजह से हमारे मन में उसके लिए सम्मान है. पिछले डेढ़ माह से ईडी मुझसे पत्र-व्यवहार कर रही है. उसे जो भी जानकारी या दस्तावेज चाहिए थे, वह हमने समय-समय पर मुहैया कराए हैं लेकिन कभी शंका व्यक्त नहीं की गई. उन्होंने कहा कि बीजेपी के बंदर उछलकूद कर रहे हैं. इसके साथ ही राऊत ने तीखे शब्दों में केंद्र सरकार और बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि मुझसे पंगा मत लेना, मैं नंगा आदमी हूं. मैं शिवसैनिक हूं. मेरे पास बीजेपी की फाइल है. अगर उसे निकाला तो भाजपाइयों को देश छोड़कर भागना पड़ेगा. मेरे पास बीजेपी के 121 लोगों के नाम हैं जिन्हें जल्द ही मैं ईडी को दूंगा. इनकी जांच के लिए ईडी को 5 साल काम करना पड़ेगा, तब उसे पता चलेगा कि किससे पंगा लिया है! शिवसेना अपने तरीके से उन्हें जवाब देगी. राऊत ने कहा कि मुझे अलग-अलग तरीके से डराने-धमकाने की कोशिश की गई. शिवसेना व एनसीपी के 22 विधायकों की सूची दिखाते हुए कहा गया कि धीरे-धीरे इन पर ईडी या दूसरी एजेंसी कार्रवाई करेंगी. मैं इस तरह की चीजों से डरने वाला नहीं हूं. उन्होंने कहा कि पिछले 3 महीने से बीजेपी के 3 लोग लगातार मुंबई स्थित ईडी के कार्यालय में जाकर दस्तावेज बाहर निकाल रहे हैं. यदि ऐसा नहीं है तो बीजेपी को नोटिस के बारे में जानकारी कैसे मिली?

राकां ने भी राजनीतिक द्वेष का आरोप लगाया

राकां के वरिष्ठ नेता नवाब मलिक ने आरोप लगाया कि जबसे बीजेपी केंद्र में आई है तब से ईडी का खेल चल रहा है. विपक्ष को डराने के लिए ईडी का नोटिस भेजा जाता है. राजनीतिक द्वेष के चलते केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल हो रहा है. जांच के नाम पर बदनाम करना गलत है. मीडिया को पहले ही बता दिया जाता है कि हम नोटिस भेजने वाले हैं.