भारतीय वैक्सीन चाहिए लेकिन भारतीय यात्रियों पर ब्रिटेन का प्रतिबंध

    कोविशील्ड वैक्सीन को अस्वीकार करते हुए ब्रिटेन अपने नए यात्रा नियमों में भारतीय यात्रियों से भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है जो कि अत्यंत निंदनीय और दुर्भावनापूर्ण है. यह ब्रिटिश सरकार की नस्लभेदी सोच और मानसिक संकीर्णता को दर्शाता है. ब्रिटेन के नए अंतरराष्ट्रीय प्रवास नियमों में भारत के जिन यात्रियों ने कोविशील्ड/ कोवैक्सीन के 2 टीके लगवा लिए हैं, उन्हें वैक्सीनेटेड नहीं माना जा रहा है और अनिवार्य रूप से 10 दिन आइसोलेशन में रहने को कहा जा रहा है. ब्रिटेन का यह बर्ताव ‘गुड़ खाए गुलगुले से परहेज’ जैसा है. ब्रिटेन में अब तक 4 करोड़ 80 लाख टीके लगाए गए हैं जिनमें से 50 लाख वैक्सीन भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से निर्यात की गई थी. यदि भारतीय वैक्सीन के प्रति शंका थी तो अंग्रेजों ने यह टीके लिए ही क्यों? भारत ने वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम में लगभग 6 करोड़ 60 लाख टीके निर्यात किए थे.

    अगले माह से भारत फिर वैक्सीन का निर्यात व दान शुरू करने जा रहा है. भारतीयों के वैक्सीन सर्टिफिकेट आधार कार्ड से लिंक होने की वजह से डिजिटल प्लेटफार्म ‘कोविन’ पर कभी भी जांचे जा सकते हैं. सारी प्रक्रिया डिजिटल है. कोविन, नागरिकों को अपने पासपोर्ट से वैक्सीन सर्टिफिकेट जोड़ने की अनुमति भी देता है. भारत ने ब्रिटेन को उसके भेदभावपूर्ण रवैये को लेकर सख्त चेतावनी दी है और कहा है कि वह भी इसी तरह का जवाबी कदम उठा सकता है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह मुद्दा ब्रिटिश अधिकारियों के सामने उठाया है. यह विवाद उस समय उत्पन्न हुआ है जब दोनों देश अपने व्यापार संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण समझौता करने जा रहे हैं. वैक्सीन को लेकर ब्रिटेन का रवैया न केवल अटपटा, बल्कि शरारतपूर्ण नजर आता है.

    ब्रिटिश सरकार के नियमों की विसंगति बताते हुए भारतीय विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने कहा कि कोविशील्ड वैक्सीन ब्रिटिश कंपनी का लाइसेंसशुदा उत्पाद है जो भारत के पुणे में बनाया गया. ब्रिटेन की सरकार के निवेदन पर हमने इसकी 50 लाख डोज उसे दी थी जो अंग्रेजों को लगाई गई. कोविशील्ड को मान्यता देने से इनकार करना भेदभावपूर्ण नीति है जो ब्रिटेन जाने वाले हमारे नागरिकों को प्रभावित कर रही है. बाद में आई खबर के अनुसार भारत का सख्त रवैया देखते हुए ब्रिटेन को होश आ गया और उसने अपनी गलती सुधारते हुए कहा कि कोविशील्ड वैक्सीन लेने वाले भारतीयों को वह अपने यहां एंट्री देगा.