Kashi Vishwanath

अयोध्या (Ayodhya) के राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक व अनुकूल फैसला आ जाने के बाद भव्य राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया लेकिन हिंदुत्व के पैरोकारों को इससे तसल्ली नहीं है. वे मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि व काशी विश्वनाथ मंदिर को भी उस अतिक्रमण से मुक्त करना चाहते हैं जो मुगल शासकों के समय किया गया था. काशी विश्वनाथ (Kashi Vishwanath) मंदिर से ज्ञानवापी मस्जिद लगी हुई है.

कृष्ण जन्मभूमि का मामला अदालत में है, इसलिए फिलहाल इस मुद्दे को नहीं लिया जा रहा है लेकिन अखिल भारतीय संत समिति ने काशी विश्वनाथ की मुक्ति के लिए कमर कस ली है. काशी या वाराणसी प्रधानमंत्री मोदी (Narendra modi) का निर्वाचन क्षेत्र है तथा यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है. ऐसी स्थिति में संतजन उम्मीद करते हैं कि कोई रास्ता अवश्य निकलेगा. देश भर के शीर्ष संत नववर्ष की शुरुआत में काशी में जुटने वाले हैं. विहिप के वरिष्ठ पदाधिकारी भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे. 2 और 3 जनवरी को होने वाली देश के प्रमुख संतों की इस बैठक की अध्यक्षता शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती (Swami vasudevanand saraswati) करेंगे तथा इसमें सारे पीठों के पीठाधीश्वरों के अलावा आर्ट ऑफ लिविंग के श्रीश्री रविशंकर व योगगुरु बाबा रामदेव को आमंत्रित किया जाएगा.

विहिप व संतों के जोर लगाने से काशी विश्वनाथ मुक्ति की दिशा में सघन प्रयास होंगे. हिंदूवादियों ने पहले भी नारा दिया था- ‘अयोध्या तो झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है.’ मोदी-योगी शासन के दौरान उन्हें काफी कुछ सकारात्मक होने की उम्मीद है. इसके अलावा अयोध्या का राम जन्मभूमि मामला भी एक मिसाल या नजीर बनकर सामने आया है. उसी की बुनियाद पर काशी का दावा आगे बढ़ाया जाएगा. यह भी प्रयास होंगे कि समझौते से कोई रास्ता निकले तो ठीक अन्यथा समय देखकर व्यापक आंदोलन भी खड़ा किया जा सकता है.