विदेशी पैमानों पर भारतीयों के स्वास्थ्य का मानक क्यों?

भारत में एलोपैथी (Allopathy) पश्चिमी देशों से आई. इसके पहले हजारों वर्षों से भारत में आयुर्वेद चिकित्सा (Allopathy Ayurveda system) पद्धति थी जिसमें सुश्रुत और चरक जैसे मूर्धन्य चिकित्सक हुए. आयुर्वेद रोगों को जड़ से समाप्त करने में विश्वास रखता है लेकिन एलोपैथी सिर्फ रोग के लक्षणों को खत्म करती है. आयुर्वेद को ‘पंचम वेद’  (Fifth veda) की संज्ञा दी गई है जिसमें वैद्य व्यक्ति की नाड़ी परीक्षा करता है और वात-पित्त-कफ की प्रबलता के आधार पर उसकी प्रकृति को समझता है. एलोपैथी चूंकि यूरोप से आई, इसलिए उसमें वहीं के मानक प्रचलित हैं. यूरोप के लोगों का शारीरिक गठन, खानपान, दैनिक जीवन यापन अलग किस्म का होता है.

इसलिए जिस प्रकार वहां स्वास्थ्य परीक्षण या इलाज का मानक है, वह भारतीय परिस्थितियों में उपयुक्त नहीं है. यूरोप में ठंड ज्यादा पड़ती है जबकि भारत एक गर्म देश है, इसलिए लोगों की प्रकृति व सहनशक्ति भी अलग है. यहां 45 डिग्री सेल्सियस में व्यक्ति धूप में निकल सकता है लेकिन कोई यूरोपियन इतनी गर्मी में गश खाकर गिर जाए. पश्चिमी देशों में कई प्रकार की एलर्जी पाई जाती हैं जैसे कि पोलन या पीनट की एलर्जी, जबकि भारत में यह समस्या इतनी नहीं है. भारत की करोड़ों की आबादी प्रकृति से जुड़ी हुई है. यहां 6 ऋतुएं हैं जबकि पश्चिमी देशों में ऑटम, फॉल और स्प्रिंग जैसे 3 मौसम हैं. व्यक्ति के स्वास्थ्य पर परिवेश का काफी असर होता है.

इसमें वहां की मिट्टी, जल, फसलों का भी कुछ न कुछ प्रभाव पड़ता है. वैज्ञानिकों ने पाया है कि भारतीयों की जीन संरचना अमेरिकन व यूरोपीय लोगों से अलग है. अमेरिकी लोगों की कद-काठी व नसें बड़ी होती हैं. उनका खानपान व जीवनशैली भी भिन्न है. इसे देखते हुए कार्डियोलॉजी सोसाइटी आफ इंडिया ने माना है कि अमेरिका व यूरोप की गाइडलाइन भारतीयों पर सटीक नहीं बैठती. यूरोपियन कार्डियोलॉजी सोसाइटी(European cardiology society) ने गत जून में रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) (Blood pressure) का सामान्य स्तर 130/90 की जगह 140/90 एमएम/एचजी मान लिया है. चूंकि भारतीयों की जीवनशैली व जीन की बनावट यूरोप के लोगों से अलग है इसलिए कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया और कई हृदय रोग विशेषज्ञों की राय में भारतीयों में बीपी का सामान्य स्तर 130/80 होना चाहिए. यदि नमक कम खाने, धूम्रपान व अल्कोहल का सेवन छोड़ने तथा योग-ध्यान और व्यायाम के बाद भी रक्तचाप 140/90 से ऊपर जाता है तो इलाज शुरू करना चाहिए. वैसे यह बात चिंताजनक है कि देश की 36 प्रतिशत आबादी हाई ब्लडप्रेशर से ग्रस्त है, जिसे नियंत्रित नहीं किया गया तो हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है. उचित होगा कि पश्चिमी देशों का अंधानुकरण न करते हुए भारत के वातावरण, खानपान, दैनिक जीवन यापन के आधार पर देश का स्वास्थ्य मंत्रालय यहां के पैमाने या मानक तय करे.